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दिशोम गुरु शिबू सोरेन का जीवन संघर्ष, स्वाभिमान और जनसेवा का अमर अध्याय है : त्रिशानु राय

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Aug 4, 2026
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चाईबासा : कांग्रेस जिला प्रवक्ता त्रिशानु राय ने पद्म भूषण से सम्मानित स्मृति शेष शिबू सोरेन की प्रथम पुण्यतिथि पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए मंगलवार को कहा कि दिशोम गुरु का संपूर्ण जीवन संघर्ष, त्याग, जनसेवा और सामाजिक न्याय के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने अपना जीवन जल, जंगल, ज़मीन, आदिवासी-मूलवासी अस्मिता, सामाजिक सम्मान तथा झारखंड की पहचान और अधिकारों की रक्षा के लिए समर्पित कर दिया। त्रिशानु राय ने कहा कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन केवल झारखंड आंदोलन के महानायक ही नहीं थे, बल्कि वे करोड़ों वंचितों, शोषितों, किसानों, मजदूरों, आदिवासियों एवं मूलवासियों की आशाओं और आकांक्षाओं के सशक्त स्वर थे। उन्होंने अन्याय, शोषण और असमानता के विरुद्ध आजीवन संघर्ष करते हुए जनहित की राजनीति को नई दिशा दी। उनका संपूर्ण सार्वजनिक जीवन इस बात का प्रमाण है कि सच्चा नेतृत्व वही होता है, जो समाज के अंतिम व्यक्ति के अधिकारों और सम्मान के लिए निरंतर संघर्ष करे।उन्होंने कहा कि झारखंड राज्य के निर्माण के ऐतिहासिक आंदोलन में दिशोम गुरु का योगदान सदैव स्वर्णाक्षरों में अंकित रहेगा। उनके नेतृत्व, दूरदर्शिता और अदम्य साहस ने झारखंड की जनभावनाओं को एक नई ऊर्जा प्रदान की। उन्होंने केवल एक राज्य के निर्माण का सपना नहीं देखा, बल्कि ऐसे झारखंड की परिकल्पना की जहाँ सामाजिक न्याय, समान अवसर, लोकतांत्रिक अधिकार और विकास की धारा समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे। त्रिशानु राय ने कहा कि दिशोम गुरु की राजनीति सत्ता प्राप्ति की राजनीति नहीं थी, बल्कि जनविश्वास, संघर्ष और सेवा की राजनीति थी। उन्होंने सदैव संविधान के मूल्यों, लोकतांत्रिक परंपराओं और सामाजिक समरसता को सर्वोच्च स्थान दिया। उनका सादगीपूर्ण जीवन, अटूट जनसंपर्क और संघर्षशील व्यक्तित्व आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने कहा कि आज उनकी प्रथम पुण्यतिथि पर हम सभी का दायित्व है कि उनके दिखाए मार्ग पर चलने का संकल्प लें तथा जल, जंगल, ज़मीन, आदिवासी-मूलवासी अस्मिता, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए निरंतर कार्य करें। यही दिशोम गुरु के प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।


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