
सरायकेला (नीमडीह), 18 मार्च 2026: दलमा की तराई में बसे आदिवासी बहुल गांव टेंगाडीह के उत्क्रमित मध्य विद्यालय से शिक्षा व्यवस्था की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो सिस्टम पर सवालिया निशान लगाती है। स्कूल प्रबंधन की लापरवाही के कारण 8वीं बोर्ड के 11 छात्र-छात्राओं का एडमिट कार्ड नहीं बन सका, जिससे वे 2 मार्च को आयोजित परीक्षा में शामिल नहीं हो पाए।

“एडमिट कार्ड बनाने वाले की मां मर गई थी…” – हेडमास्टर का अजीबोगरीब बहाना

हैरानी की बात यह है कि जब छात्रों ने प्रवेश पत्र मांगा, तो उन्हें बताया गया कि जो एडमिट कार्ड बनाता है, उसके घर में मौत हो गई थी। बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ का यह आलम तब है जब स्कूल में तीन सरकारी शिक्षक नियुक्त हैं और लाखों में वेतन उठा रहे हैं। अभिभावकों का आरोप है कि शिक्षक आते तो हैं, पर पढ़ाई नहीं कराते।
जमीन पर बैठकर पढ़ने को मजबूर 100 बच्चे
स्कूल की बदहाली का आलम यह है कि पहली से आठवीं तक के लगभग 100 छात्र-छात्राएं एक ही कमरे में जमीन पर बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। न बेंच है, न टेबल। पूर्व में नक्सल प्रभावित रहे इस क्षेत्र में सरकार ने बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए यह स्कूल खोला था, लेकिन शिक्षकों की उदासीनता ने इसे ‘भविष्य बर्बाद करने वाला केंद्र’ बना दिया है।
प्रशासन की कार्रवाई: शो-कॉज और वेतन पर रोक
मामला तूल पकड़ने पर नीमडीह के बीईओ संजय कुमार जोशी ने कड़ी कार्रवाई के संकेत दिए हैं:
प्रधानाध्यापक को शो-कॉज: सरसिज कुमार (प्रधानाध्यापक) से स्पष्टीकरण मांगा गया है।
वेतन रोका: लापरवाही के कारण प्रधानाध्यापक का वेतन तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है।
विशेष परीक्षा का आश्वासन: बीईओ ने भरोसा दिलाया है कि एक महीने के भीतर विशेष परीक्षा आयोजित कर वंचित बच्चों को एक और मौका दिया जाएगा।
परीक्षा से वंचित हुए छात्र:
चित्रा सिंह, उत्तम सिंह, प्रतिमा सिंह, उर्मिला दास, जीतवाहन सिंह, चंपारानी सिंह, प्रियंका मुर्मू, वनबिहारी सिंह, सुशील हांसदा, शुभम मांझी और मनोज सिंह।
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