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झरिया का ‘पॉश’ इलाका या नर्क का द्वार? विकास के नाम पर बिछी विनाश की बिसात!

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Apr 26, 2026
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धनबाद: कहने को तो झरिया कोयलांचल की धड़कन है, लेकिन यहाँ की हकीकत देखकर किसी की भी रूह कांप जाए। झरिया में बिजली और पानी की दुर्गति अब कोई छिपी हुई बात नहीं है, बल्कि यह यहाँ के लोगों की #नियति बन चुकी है। रविवार को इसका एक ऐसा जीता-जागता और खौफनाक मंजर सामने आया, जिसने विकास के दावों की कलई खोलकर रख दी है। झरिया का सबसे वीआईपी और ‘पॉश’ कहा जाने वाला वार्ड 36 का मेन रोड स्थित चार नंबर टैक्सी स्टैंड इन दिनों आँसू बहा रहा है । यहाँ के एक स्थानीय निवासी ने सोशल मीडिया पर अपनी पीड़ा का जो वीडियो साझा किया है, वह व्यवस्था के मुँह पर एक जोरदार तमाचा है। वीडियो में साफ दिख रहा है कि कैसे हर घर नल जल योजना यहाँ के लोगों के लिए ‘जी का जंजाल’ बन गई है। वीडियो मे युवक कहता है कि पाइपलाइन बिछाने के नाम पर ठेकेदार ने यहाँ की सीमेंटेड सड़कों का वह हाल किया है कि अब सड़क और मलबे के ढेर में फर्क करना मुश्किल है।
‘कोढ़ में खाज’ यह कि सड़क तोड़ने के बाद बड़े-बड़े पत्थर और मलबा वहीं लावारिस छोड़ दिया गया है। “हालत यह है कि जहाँ से शुद्ध जल की धारा बहनी चाहिए थी, वहाँ आज गंदगी का सैलाब उमड़ रहा है।”नाली का पानी और प्यासे होंठ: एक कड़वा सच
ठेकेदार की लापरवाही ने जल निकासी की नालियों को भी तहस-नहस कर दिया है। अब नाली का बदबूदार और दूषित पानी सड़कों पर अठखेलियाँ कर रहा है। विडंबना देखिए लोग शुद्ध पेयजल भरने के लिए उसी गंदे और बजबजाते पानी से गुजरने को मजबूर हैं। बीमारियों को खुला निमंत्रण दिया जा रहा है। बुजुर्गों और बच्चों का पैदल चलना ‘लोहे के चने चबाने’ जैसा हो गया है।
वीडियो बनाने वाले युवक ने भरे मन से स्थानीय जनप्रतिनिधियों को इस नर्क जैसी स्थिति का संज्ञान लेने की गुहार लगाई है। सवाल यह उठता है कि क्या वोट बटोरने वाले सफेदपोशों को जनता की यह कराह सुनाई नहीं देती? क्या झरिया की नियति सिर्फ धूल, धुआँ और कीचड़ बनकर रह गई है?

यह वीडियो सिर्फ एक शिकायत नहीं, बल्कि उस सिस्टम के खिलाफ एक ‘ जंग का शंखनाद’ है जो एयरकंडीशन्ड कमरों में बैठकर विकास की रूपरेखा तैयार करता है, लेकिन जमीन पर उतरते ही वह विकास ‘भ्रष्टाचार की भेंट’ चढ़ जाता है। अब देखना यह है कि इस वीडियो के बाद प्रशासन की नींद खुलती है या झरिया के लोग इसी तरह ‘तिल-तिल मरने’ को मजबूर रहेंगे।


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