

सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल वन विभाग रेंज अंतर्गत ईचागढ़ थाना क्षेत्र के सोड़ो पंचायत स्थित हाड़ात गांव में शुक्रवार की रात जंगली हाथियों ने भीषण उत्पात मचाया। इस दर्दनाक घटना में एक ही परिवार के 2 लोगों की मौत हो गई, जबकि 3 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।

आधी रात घर में घुसा हाथियों का झुंड:..? बताया जा रहा है कि गुरुवार देर रात करीब 1 बजे जंगली हाथियों का एक झुंड गांव में घुस आया। हाथियों ने महतो परिवार के कच्चे मकान पर हमला कर दिया। दीवार तोड़कर घर में घुसने के दौरान परिवार के लोग हाथियों की चपेट में आ गए।
*मां-बेटी की मौके पर मौत:* इस हमले में चाइना देवी और उनकी बेटी अमिता कुमारी की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, कमलचंद महतो, मोहन महतो और सतुला देवी गंभीर रूप से घायल हो गए। चीख-पुकार सुनकर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और मशाल जलाकर हाथियों को खदेड़ा।
सभी घायलों को तत्काल एमजीएम अस्पताल, जमशेदपुर ले जाया गया। जहां कमलचंद महतो की हालत नाजुक बनी हुई है। अन्य दो घायलों का इलाज जारी है।
गांव में दहशत का माहौल:..? घटना के बाद से हाड़ात गांव में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों ने बताया कि पिछले एक सप्ताह से इलाके में 8-10 हाथियों का झुंड घूम रहा है। फसल को नुकसान पहुंचाने के बाद अब जानलेवा हमले हो रहे हैं।
सूचना मिलते ही चांडिल रेंजर और ईचागढ़ थाना पुलिस मौके पर पहुंची। वन विभाग ने मृतकों के परिजनों को तत्काल 25-25 हजार रुपये की सहायता राशि दी है। सरकारी प्रावधान के तहत 4-4 लाख रुपये मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। घायलों के इलाज का पूरा खर्च वन विभाग उठाएगा।
वन विभाग ने हाथियों को जंगल की ओर खदेड़ने के लिए टीम गठित कर दी है। ग्रामीणों से रात में सतर्क रहने और जंगल की ओर न जाने की अपील की गई है।
दलमा से पलायन कर ईचागढ़ पहुंचे हाथी, मां-बेटी की मौत के बाद ग्रामीणों में आक्रोश; पूछा- जिम्मेदार कौन..?
चांडिल अनुमंडल क्षेत्र के दलमा वन्य प्राणी आश्रयणी में इस समय एक भी हाथी नहीं है। गज परियोजना के तहत हाथियों के लिए भोजन-पानी की पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण पूरा झुंड पलायन कर ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र में डेरा डाले हुए है। शाम ढलते ही हाथियों का झुंड भोजन-पानी की तलाश में जंगल से उतरकर गांवों में प्रवेश कर जाता है।
घरों को बनाते हैं निशाना: हाथी सीधे घरों को टारगेट कर रखे अनाज को अपना निवाला बनाते हैं। मिट्टी के घरों को तोड़ देते हैं। इसी क्रम में बीते रात हाड़ात गांव में एक ही परिवार की मां चाइना देवी और बेटी अमिता कुमारी की मौत हो गई,अ जबकि तीन लोग गंभीर घायल हैं।
*”तिल-तिल मरने से अच्छा एक बार मार दे सरकार”:* घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। लोग पूछ रहे हैं कि इसका जिम्मेदार कौन है? ग्रामीणों का कहना है, _”शाम ढलते ही काले साए का डर लगा रहता है। पता नहीं कब आंगन में मौत बनकर हाथी खड़े हों। तिल-तिल करके मरने से अच्छा सरकार एक ही बार मार क्यों नहीं देती।”_
*करोड़ों खर्च फिर भी हालात बदतर:* ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि आज केंद्र और राज्य सरकार द्वारा वन एवं पर्यावरण पर प्रति वर्ष करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं। वन और जंगली जीव-जंतुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए गज परियोजना चलाई जा रही है, फिर भी गजराज का पलायन जारी है। इससे आम नागरिक चिंतित हैं।
*मुआवजे पर भी सवाल:* ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग “चंद रुपया देखकर अपने अधिकार से मुंह मोड़ लेता है।” दूसरे राज्यों की तुलना में झारखंड में मुआवजे की राशि कम दी जाती है। हाथी-मानव संघर्ष बढ़ने से आज ग्रामीण गांव छोड़कर शहरी क्षेत्रों में भागने पर मजबूर हैं।
चांडिल रेंजर ने बताया कि दलमा में पानी की कमी और भोजन संकट के कारण हाथी निचले इलाकों में आ रहे हैं। टीम गठित कर हाथियों को जंगल की ओर खदेड़ने का प्रयास किया जा रहा है। मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर स्थायी समाधान नहीं निकला तो हाथी और मानव का संघर्ष और भयावह रूप लेगा। दलमा में जल स्रोत और भोजन की व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग उठ रही है।
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