
सरायकेला-खरसावां जिले के तिरुलडीह पंचायत अंतर्गत सापारुम गाँव में दलना वन्य प्राणी आश्रयणी के जंगली हाथियों के हमले से एक व्यक्ति की दर्दनाक मौत हो गई। मृतक की पहचान राधा तंतुबाई (उम्र लगभग 55 से 60 वर्ष) के रूप में हुई है।


प्राप्त जानकारी के अनुसार, जंगली हाथी गांव में घुस प्रवेश किया और इसी दौरान राधा तंतुबाई उसकी चपेट में आ गए, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई। घटना के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल है और ग्रामीण भय के साए में जीने को मजबूर हैं।भोजन ओर पानी की तलाश में हाथियों की झुंड रात ही नहीं बल्कि सुबह दिन दोपहर शाम हाथी की झुंड भोजन पानी की खोज में गांव में प्रवेश कर जाते हे।ओर मानव संघर्ष होता है।
सूचना मिलते ही चांडिल वन क्षेत्र विभाग के पदाधिकारी मौके पर पहुंचे और आवश्यक कागजी प्रक्रिया पूरी करते हुए मृतक के परिजनों को ₹50,000 की नगद सहायता राशि प्रदान की। वहीं शेष ₹3.50 लाख की राशि कागजी प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद उनके बैंक खाते में भेजी जाएगी।
घटना की जानकारी मिलते ही थाना प्रभारी कौशल कुमार भी अपने दलबल के साथ मौके पर पहुंचे और शव को पोस्टमार्टम के लिए सरायकेला सदर अस्पताल भेज दिया गया।
लगातार हो रही ऐसी घटनाओं से आक्रोशित ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गांव में हाथी दस्ता की तैनाती की जाए। साथ ही हाथियों को भगाने के लिए टॉर्च लाइट और पटाखों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। पश्चिम बंगाल के अपेक्षा झारखं राज्य में हाथी आने जाने सूचना ग्रामीणों को नहीं दिया जाता हे, जिसे आम मानस को हाथियों के साथ संघर्ष होता हे। जंगल की तराई में अवैध रूप से देशी महुआ दारू की चुलाई का संचालक द्वारा किए उस पर रोक लगे ।हाथी की झुंड दारू की चुलाई सामग्री प्रदार्थ को खाने के बाद मस्त हो जात हे। जिसे हाथी भटके रहते हे४ मानव को देखते ही आक्रमक कर देते हे।हाथी की झुंड को दलम सेंचुरी चांडिल की ओर ड्राइव करके पहुंची जाए ।जहां उसके उसके लिए उचित जगह हे।
इसके अलावा मृतक के परिजनों को यथासंभव रोजगार उपलब्ध कराने की भी मांग की गई है। मालुम हो कि लगातार ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र में हाथियों द्वारा क्षेत्र में उत्पात मचा रखा है,आए दिन खबर आते रहता है, कभी किसी का मकान ,दुकान तो कभी किसानों के फसल को खाकर हाथी नष्ट कर जाता है,
जहां गरीब किसान कड़ी मेहनत से अपना फसल तैयार करता है वहीं जंगली हाथी एक ही बार में पूरा फसल को नष्ट कर जाता है, मुल रूप से पूरा ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र कृषि पर ही आश्रित है,खेत से होने वाले धान या अन्य फसल से ही यहां के लोगों का आजीविकाएं चलती है।यदि इस तरह से हाथी का आतंक बना रहा है,तो किसान खेती छोड़कर अपने आजीविका चलाने के लिए शहरों में पलायन के लिए बाध्य होंगे।
वन विभाग द्वारा हाथियों को वनों में ही रोकने हेतु उचित व्यवस्था होना चाहिए,जिससे कि आम जन मानस को इस तरह की समस्याओं का सामना न करना पड़े और किसान सुगमता से अपना कृषि कार्य को बरकरार रखा सके।तथा गांवों में हाथी भगाओ दस्ता टीम बनाकर यदि किसी कारणवश हाथी जंगल से भटकर गांव की और आए तो उसको तत्काल ही सेंचुरी में वापस भगाया जा सके।
आज सरायकेला खरसावां जिले के विभिन्न प्रखंड क्षेत्र में अवैध रूप से देशी महुआ शराब भाटी की संचालन बड़े पैमाने से चल रहा हे।जिला प्रशासन ओर उत्पाद विभाग पर सवाल उठ रहा हे।
वन विभाग की माने तो नीमडीह प्रखंड अंतर्गत 31 छोटे बड़े भट्ठियां संचालन हो रहा।,चांडिल प्रखंड में महज दो किलो मीटर दूरी पर आरा मशीन चलाया जा रहा हे।साथ ही देशी शराब की उत्पादन जोरो से ग्रामीणों मानना हे कि इस पर विभाग कार्रवाई क्यों नहीं करता हे।आज जंगल की कटाई से वन जीव जंतु जंगल छौड़कर गांव में प्रवेश कर जाते हैं।
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