
पूर्व विधायक उमाशंकर अकेला के नेतृत्व में सैकड़ों ग्रामीणों का प्रदर्शन, 10 दिनों में सुनवाई नहीं हुई तो अनशन की चेतावनी
चौपारण(हजारीबाग): करमा गांव में भूदान यज्ञ समिति से मिली तीन एकड़ जमीन पर कब्जे के आरोप सहित कुबरी गाँव मे जमीन को लेकर मंगलवार को पूर्व विधायक उमाशंकर अकेला के नेतृत्व में सैकड़ों ग्रामीणों ने प्रखंड सह अंचल कार्यालय परिसर का घेराव किया। इस दौरान ग्रामीणों ने जमकर नारेबाजी करते हुए जमीन कब्जा मामले में कार्रवाई की मांग की। ग्रामीणों ने “राजदेव यादव गरीबों का शोषण करना बंद करो” और “सांसद और विधायक के संरक्षण में जमीन हड़पना बंद करो” जैसे नारे लगाए।

प्रदर्शन के बाद पूर्व विधायक उमाशंकर अकेला एवं ग्रामीणों ने अंचलाधिकारी संजय यादव को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की जानकारी दी और जमीन की जांच कर कार्रवाई करने की मांग की। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि 10 दिनों के अंदर मामले में सुनवाई नहीं होती है तो बड़े पैमाने पर प्रखंड सह अंचल परिसर का घेराव करने के साथ अनशन किया जाएगा।

भूदान में मिली थी तीन एकड़ जमीन
ज्ञापन में करमा गांव निवासी संतोष भुईयाँ ने बताया है कि उनके दादा स्व. काली भुईयाँ को वर्ष 1955 में भूदान यज्ञ समिति, हजारीबाग द्वारा मौजा करमा, थाना नंबर 51, खाता नंबर 59, प्लॉट नंबर 12 में तीन एकड़ भूमि दी गई थी। आवेदन के अनुसार भूमि की चौहद्दी उत्तर में बिनोवा जी टांड़, दक्षिण में गन्दौरी भुईयाँ, पूरब में रास्ता तथा पश्चिम में जंगल-झाड़ी है।
संतोष भुईयाँ के अनुसार उनके दादा उक्त भूमि पर दखलकार थे, लेकिन बीमारी के कारण उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद उनके पिता चेतलाल भुईयाँ की भी कम उम्र में मृत्यु हो गई। उस समय संतोष नाबालिग थे और उनकी मां मजदूरी कर उनका पालन-पोषण करती थीं। बाद में जमीन के कागजात और स्थल की जानकारी लेने पर कथित तौर पर जमीन पर अन्य लोगों का कब्जा पाया गया।
राजदेव यादव समेत सात लोगों पर कब्जे का आरोप
संतोष भुईयाँ ने आवेदन में आरोप लगाया है कि राजदेव यादव, शिबा यादव, खेलावन यादव, बाजो यादव, शशि यादव, अभिजीत कुमार यादव उर्फ ललू यादव तथा महेंद्र यादव ने उक्त जमीन पर मकान बनाकर कब्जा कर रखा है। जमीन के संबंध में पूछताछ करने पर धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है। संतोष ने प्रशासन से जमीन को कब्जामुक्त कराकर उन्हें दखल दिलाने की मांग की है।
‘जमीन वापस करनी होगी’—विकास गुप्ता
मौके पर कांग्रेस जिला महासचिव सह करमा गांव निवासी विकास गुप्ता ने कहा कि संतोष भुईयां की जमीन पर यदि राजदेव यादव का कब्जा है तो जमीन वापस करनी होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि राजदेव यादव द्वारा यह कहा जा रहा है कि जमीन उनकी अथवा उनके पिता की है, जबकि उपलब्ध कागजात के अनुसार जमीन संतोष भुईयां के दादा स्व. काली भुईयां के नाम से जुड़ी है। विकास गुप्ता ने यह भी आरोप लगाया कि उक्त जमीन पर पूर्व में राजदेव यादव के परिवार द्वारा कलाली चलाकर शराब बेची जाती थी।
विकास गुप्ता ने राजदेव यादव पर जंगल से खैर की लकड़ी चोरी कर उससे कत्था बनाकर बेचने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यों में कथित रूप से पहले से ही उनकी संलिप्तता रही है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
कागजात दिखाकर उठाया सवाल—रेवाली पासवान
करमा निवासी सह कांग्रेस जिला सचिव रेवाली पासवान ने कहा कि राजदेव यादव द्वारा शुरू से ही जमीन हड़पने का काम किया जा रहा है। उन्होंने मौके पर कागजात दिखाते हुए कहा कि अन्य लोगों को भी भूदान यज्ञ समिति की ओर से जमीन मिली है और उनकी चौहद्दी में संतोष भुईयां के दादा स्व. काली भुईयां के नाम का उल्लेख है। ऐसे में यह जमीन राजदेव यादव की कैसे हो सकती है, इसकी प्रशासन को जांच करनी चाहिए।
ग्रामीण बोले—हकीकत में संतोष की जमीन
प्रदर्शन में शामिल ग्रामीणों ने अंचलाधिकारी संजय यादव के समक्ष कहा कि जमीन हकीकत में संतोष भुईयां की है और उनके दादा स्व. काली भुईयां को वर्ष 1955 में भूदान यज्ञ समिति द्वारा जमीन दी गई थी। ग्रामीणों ने उपलब्ध दस्तावेजों की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने तथा संतोष भुईयां को न्याय दिलाने की मांग की।
ग्रामीणों ने कहा कि गरीब परिवार की जमीन पर यदि किसी प्रकार का अवैध कब्जा हुआ है तो प्रशासन को तत्काल जांच कर कार्रवाई करनी चाहिए। साथ ही उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि 10 दिनों के भीतर मामले में सुनवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
सीओ बोले—जांच के बाद होगी कार्रवाई
इस संबंध में अंचलाधिकारी संजय यादव ने कहा कि आवेदन प्राप्त हुआ है। मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।
मौके पर रामफल सिंह, लव सिंह, दिगंबर भुईयां, मुखिया प्रतिनिधि अभिमन्यु भगत, प्रह्लाद सिंह, टुन्नू वर्णवाल, मनोज सिंह, उमेश सिंह, वसीम खान, डबलू अंसारी, पूर्व मुखिया शौकत खान, विजय गुप्ता, शकील खान समेत सैकड़ों महिला-पुरुष मौजूद थे।
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