
आज दिनांक 19 मार्च 2026, गुरुवार को कोल्हान विश्वविद्यालय, चाईबासा के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा (TRL) विभाग के विभागीय सभागार में विभागध्यक्ष सह मानविकी संकायाध्यक्ष डॉ. तपन कुमार खाँड़ा की अध्यक्षता में “ब्हा सह सरहुल मिलन समारोह” का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का प्रारंभ राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम से हुई। इस अवसर पर वक्ता के रूप में हो समाजसेवी, लेखक एवं कवि श्री सोनु हेस्स: उड़ीसा से कुडमालि कवि श्री निरंजन महांता, समाजसेवी श्री सुभाष महांता, श्री रत्नाकर महांता, आकाशवाणी चाईबासा से श्री नित्यानंद महतो उपस्थित हुए। सभी वक्ताओं एवं अतिथियों का स्वागत साल फूल एवं पारंपरिक अंग वस्त्र देकर किया गया। इस अवसर पर कुडमालि भाषा के विद्यार्थियों ने स्वागत गीत गाकर सबों का स्वागत किया। कार्यक्रम का औपचारिक शुरुआत साल की पेड़ में पानी चढ़कर किया गया उसके पश्चात विद्यार्थियों द्वारा गोहारी गीत से प्रकृति का वंदना भी किया। स्वागत भाषण डॉ. बसंत चाकी ने दिया साथी उन्होंने कहा कि टी आर एल विभाग संस्कृति से गहराई से जुड़ा हुआ है और इस प्रकार के कार्यक्रमों का निरंतर आयोजन आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी भाषाई एवं सांस्कृतिक विरासत पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण से शोध करने तथा समाज को नई दिशा देने के लिए प्रेरित किया। साथ ही उन्होंने ब्हा पर्व की उत्पत्ति पर संक्षिप्त प्रकाश डाला। बारी-बारी से सभी वक्ताओं ने अपना संबोधन दिया। श्री निरंजन महांता ने अपने संबोधन में कहा प्रकृति कुड़मियों का एक अभिन्न अंग है इनकी हर गतिविधियाँ प्रकृति के अनुरूप होती है। सरहुल यह एक प्रथागत पर्व है जो परंपरा से ही मनाई जा रही है इससे संजोए रखने की आवश्यकता है साथी उन्होंने सरहुल से संबंधित एक गीत भी गाकर सबों का मन को मोहित कर दिया। श्री सोनु हेस्स:

अपने संबोधन में सरहुल को प्रकृति का पर्व बताते हुए कहा कि हमें प्रकृति के अनुकूल कार्य करना चाहिए, प्रकृति से प्रेम करना चाहिए, क्योंकि हमारा समस्त अस्तित्व प्रकृति पर ही आधारित है। अतः प्रकृति का सम्मान करना हम सभी का कर्तव्य है। कार्यक्रम को श्री सुभाष महांता एवं श्री नित्यानंद महतो ने भी संबोधित किया इस अवसर पर हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. विजय पीयूष, अंग्रेजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सरोज कैवर्त, बांग्ला विभागाध्यक्ष डॉ. संचिता भूंई सैन, दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. अर्चना कुमारी गुप्ता, ओड़िया विभागाध्यक्ष डॉ. विधु भूषण भुइयां, कॉमर्स डीन डॉ. मंगला श्रीवास्तव सबों ने अपने-अपने संबोधन में प्राकृतिक के प्रति अपनी स्नेह और प्यार देते हुए इसे संजय एवं बचाए रखने हेतु विद्यार्थियों को प्रेरित किया।

अन्य वक्ताओं ने भी ब्हा पर्व को प्रकृति और फूलों का पर्व बताते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से हमारी सांस्कृतिक परंपराएं संरक्षित रहती हैं।अंत में अध्यक्षीय संबोधन में TRL विभागाध्यक्ष सह मानविकी संकायाध्यक्ष डॉ. तपन कुमार खाँड़ा ने सभी वक्ताओं के संभाषण का विश्लेषण करते हुए कहा की प्रकृति हमारी जननी है इसे अपनी माता की तरह ख्याल रखना है और इसकी रक्षा करना हम सब का परम कर्तव्य है। डॉ. खाँड़ा ने सबों को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए इस तरह की कार्यक्रम में पुनः आपलोग आए यही हमारी इच्छा है। कार्यक्रम का सफल संचालन TRL विभाग के सहायक प्राध्यापक कुडमालि विषय के प्रभारी डॉ. सुभाष चंद्र महतो ने किया गया।
समारोह में TRL विभाग के हो, कुड़माली एवं संथाली के छात्र-छात्राओं ने पारंपरिक लोकगीत एवं लोकनृत्य प्रस्तुत कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रीय गान से हुई।
इस अवसर पर TRL विभाग के शिक्षण सहायक, रामदेव बोयपाई एवं दिकु हांसदा एवं विद्यार्थियों की बड़ी संख्या में सहभागिता रही और समारोह अत्यंत हर्षोल्लास एवं धूमधाम के साथ सम्पन्न हुआ।
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