

सामुदायिक भवन,सरना उमुल टायो गेट, गम्हारिया में बड़े ही उत्साह एवं गरिमा के साथ किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक पूजा-अर्चना के साथ हुई, जिसके पश्चात माननीय अतिथियों का स्वागत किया गया एवं उन्हें सम्मानित किया गया।
आयोजित विचार गोष्ठी में वक्ताओं ने पंडित रघुनाथ मुर्मू जी के जीवन, उनके अमूल्य योगदान तथा ओल चिकी लिपि के महत्व पर विस्तारपूर्वक अपने विचार व्यक्त किए।
इसके उपरांत आयोजित विशेष सत्र में परगना एवं मांझी बाबा द्वारा समाज में ओल चिकी लिपि के संरक्षण, संवर्धन एवं इसके साथ जुड़ाव को लेकर सार्थक चर्चा की गई।
कार्यक्रम के दौरान प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने माहौल को जीवंत बनाए रखा तथा अंत में आयोजित सांस्कृतिक अखड़ा में लोक नृत्य, गीत-संगीत एवं पारंपरिक प्रस्तुतियों ने उपस्थित जनसमूह का मन मोह लिया।
इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में दुगनी पीर परगना बाबा उपस्थित रहे। साथ ही विभिन्न गांवों के मांझी बाबा, समाजसेवी एवं बुद्धिजीवी वर्ग के लोग भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
कार्यक्रम के दौरान सभी अतिथियों ने ओल चिकी लिपि को पढ़ने-लिखने, इसके संरक्षण एवं इसे जन-जन तक पहुंचाने के लिए महत्वपूर्ण विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम को सफल बनाने में ओल चिकी शिक्षकों—श्रीमती गौरी मांझी, संगीता टुडू, अंजलि मुर्मू, सविता टुडू,मनीषा टुडू, करिया हेम्ब्रम एवं पिंकी सोरेन का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
इसके अतिरिक्त सहयोगी छात्रगण में गोपाल हेम्ब्रम, राजेश टुडू, राजेश मांझी, सुमन मुर्मू एवं रबीना हांसदा ने भी अपनी सक्रिय भूमिका निभाई।
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