
धनबाद: बरमुंडी स्थित खटाल को खाली कराने और भूमि मापी की कार्रवाई से आक्रोशित व चिंतित सैकड़ों खटाल विस्थापित शुक्रवार को उपायुक्त कार्यालय पहुंचे। पीड़ितों ने अपनी समस्याओं को लेकर प्रशासन और सरकार के समक्ष पुनर्वास की पुरजोर गुहार लगाई।
खटालवासियों का कहना है कि लगभग 22-23 वर्ष पूर्व (वर्ष 2005 के दौरान) तत्कालीन जिला प्रशासन ने उन्हें बेकारबांध तालाब के पास से हटाकर बरमुंडी में बसाया था। उस समय वहां वीरान जंगल जैसा माहौल था, जहां लोगों ने अपनी मेहनत से झोपड़ियां बनाकर रहना शुरू किया। अब उस इलाके का तेजी से शहरीकरण हो गया है और आसपास बड़े-बड़े शोरूम व व्यावसायिक प्रतिष्ठान बन गए हैं, जिसके बाद प्रशासन को अचानक यह भूमि अतिक्रमण नजर आने लगी है।

विस्थापितों ने स्पष्ट किया कि प्रशासन उनसे पक्के मकान हटाने और खटाल खाली करने को कह रहा है। पीड़ितों के अनुसार, तत्कालीन डीसी द्वारा दिए गए आवंटन और प्रशासनिक कागजातों को निकालकर वे अपनी बात रखेंगे।

उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि यदि भूमि खाली कराई जाती है, तो पहले सभी 200 परिवारों के पुनर्वास (आवास/कॉलोनी) का समुचित प्रबंध किया जाए।
केवल गरीबों की झोपड़ियों को निशाना न बनाया जाए; यदि कार्रवाई हो तो आसपास के बड़े-बड़े अतिक्रमणकारियों पर भी निष्पक्ष रूप से हो। खटालवासियों ने चेतावनी दी है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाएंगे और यदि उन्हें बिना वैकल्पिक व्यवस्था के उजाड़ा गया, तो वे उग्र आंदोलन और धनबाद बंद करने को विवश होंगे।
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