

रिपोर्ट सत्येन्द्र यादव
कुल्टी : अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला सम्मेलन कुल्टी शाखा का शुक्रवार को श्रीराम कथा में शिवम शुक्ला जी महाराज ने भोजन(प्रसाद) कि महता पर प्रकाश डाला।

इस दौरान कथा वाचक शिवम शुक्ला जी महाराज ने कहा कि घर में बबने वाली रसोई को भोजन की दृष्टी से न देखे, बल्की प्रसाद समझे, जो मां रसोई में स्नेह और प्यार से प्रसाद बनाती है। उसका पहला भोग तुलसी पत्ता डालकर भगवान को अर्पण करें। इसे से परिवार में सुख स्मृद्धि आती हैं इस प्रकार के प्रसाद को पाने वाले परिवार कि मां कभी वृद्धाश्रम नहीं जा सकती हैं। परिवार में नौकर चाकर के माध्यम से बनाई गई रसोई से परिवार में विघटन होता है कारण उस रसोई से मां का स्नेह और भगवान का दर्शन प्राप्त नहीं होते। अन्न भी देवता हैं। मानव जीवन पर इस का व्यापक असर पड़ता हैं। इस लिए कहा गया। जैसा खाय अन्न वैसा होय मन।

इस दौरान शिवम शुक्ला जी महाराज ने बाल विवाह का भी मुखर विरोध किया । उन्होंने कहा कि वैदिक काल से विवाह कि आयु पच्चीस वर्षो बताई गई है और छब्बीसवें वर्ष में प्रवेश करने पर ही गृहस्थ जीवन का योग्य बताया गया है। जिसे यह मालूम चलता है कि विवाह के मामले में सनातन धर्म के प्रति भ्रामक प्रचार किया गया है और आज भी इस उम्र ही विवाह हो रहे हैं। आज चिरकुंडा, बराकर, कुल्टी तथा नियामतपुर से कथा सुनने आए लोगो की व्यापक भीड़ थी।
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