
रिपोर्ट सत्येन्द्र यादव
कुल्टी, : बराकर और कुल्टी के विभिन्न स्थानों विधिवत मंत्रोचारण के माध्यम से रविवार की देर शाम को लखी (लक्ष्मी) पूजा आंरभ हुई। सोमवार की सुबह से ही दर्शनार्थीयों की भीड़ पूजा पंडाल पर लगी हुई थी ।

लक्ष्मी पूजा का महत्व : बंग्ला में कोजागरि शब्द ‘जागर्ति’ से बना है, जिसका अर्थ होता है “कौन जाग रहा है?” ऐसी मान्यता है कि इस रात मां लक्ष्मी यह देखने के लिए धरती पर आती हैं कि कौन जाग रहा है और जो जागकर भक्ति करता है, उसे धन और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।

फसल और समृद्धि : बंगाल में मां लक्ष्मी को धन के साथ-साथ अन्न और शस्य (फसल) की देवी भी माना जाता है। धान की नई फसल और अच्छी पैदावार की कामना के लिए यह पूजा खास तौर पर की जाती है।
पूजा के मुख्य नियम और सामग्री : अल्पना : पूजा से पहले घर के आंगन, मुख्य द्वार और पूजा स्थल पर चावल के आटे से सुंदर पारंपरिक अल्पना (ड्राइंग/पैटर्न) बनाई जाती है, जिसमें मां लक्ष्मी के पैरों के निशान बनाए जाते हैं।
धन और धान : पूजा में तांबे या मिट्टी के घट (कलश) की स्थापना की जाती है, जिसके ऊपर आम के पल्लव और नारियल रखा जाता है। घट के पास धान की बाली और कौड़ी रखना बहुत शुभ माना जाता है।
भोग और प्रसाद : मां लक्ष्मी को नारियल के लड्डू, मलाई लड्डू, खीर, चिवड़ा, फल और विभिन्न प्रकार के मिष्ठान्न का भोग लगाया जाता है।
पूजारी और मंत्र : इस दिन शाम को या रात में विधि-विधान से मां लक्ष्मी की आराधना की जाती है और
लक्ष्मी पांचाली पढ़ी या सुनी जाती है। भारत में यह प्रचलित मान्यता है कि लक्ष्मी को साफ-सफाई पसंद है और वे सबसे पहले साफ-सुथरे घर में आती हैं। इसलिए इस दिन हल्दी और सिंदूर चढ़ाया जाता है। बराकर शहर के रामनगर में भव्य रूप से पूजा की जाती हैं और मेला भी लगता हैं। जब कि कुल्टी में प्रतिमा के समक्ष स्थानीय समाजिक संगठन द्वारा संस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया जाता हैं ।
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