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आसनबनी मौजा में सेल-टासरा निर्माण का विरोध जारी, ग्रामीण और प्रशासन आमने-सामने

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Jul 3, 2025

 

 

बलियापुर (उमेश चौबे) झारखंड: धनबाद जिले के आसनबनी मौजा में सेल (SAIL) और टासरा परियोजना द्वारा किए जा रहे निर्माण कार्य को लेकर ग्रामीणों का विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। गुरुवार को हालात उस वक्त और तनावपूर्ण हो गए, जब जिला प्रशासन ने निर्माण कार्य शुरू कराने के उद्देश्य से भारी संख्या में दंडाधिकारियों और पुलिस बल को मौके पर भेजा। प्रशासनिक और पुलिस टीम को देखते ही ग्रामीण उग्र हो गए और उन्होंने पुलिस प्रशासन का पुरजोर विरोध करना शुरू कर दिया।

 

मिली जानकारी के अनुसार, आसनबनी मौजा में सेल-टासरा परियोजना के तहत हो रहे निर्माण को ग्रामीण अपनी जमीन और आजीविका के लिए खतरा मान रहे हैं। पिछले कई दिनों से ग्रामीण इस निर्माण का विरोध कर रहे हैं और प्रशासन से इसे रोकने की मांग कर रहे हैं। हालांकि, जिला प्रशासन ने आज निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया, जिसके परिणामस्वरूप यह टकराव की स्थिति उत्पन्न हुई।

 

गुरुवार सुबह से ही आसनबनी मौजा में तनाव का माहौल था। जिला प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया था। मौके पर दंडाधिकारी, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, और बलियापुर के अंचलाधिकारी (CO) प्रवीण कुमार सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। जैसे ही प्रशासनिक टीम निर्माण स्थल पर पहुंची, पहले से ही जुटे ग्रामीण और अधिक उत्तेजित हो गए।

 

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कई ग्रामीण पारंपरिक हथियारों से लैस थे और उन्होंने पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी शुरू कर दी। “सेल-टासरा गो बैक!”, “प्रशासन मुर्दाबाद!” जैसे नारे लगाते हुए ग्रामीणों ने निर्माण कार्य को रोकने की मांग की। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाने-बुझाने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीण अपनी मांग पर अड़े रहे।

 

समाचार लिखे जाने तक ग्रामीणों का विरोध प्रदर्शन जारी था। प्रशासनिक पदाधिकारी ग्रामीणों को समझाने और स्थिति को सामान्य करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन ग्रामीण सेल-टासरा और जिला प्रशासन के खिलाफ एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद कर रहे थे। इस घटना ने एक बार फिर भूमि अधिग्रहण और विकास परियोजनाओं को लेकर स्थानीय आबादी और प्रशासन के बीच पनप रहे गहरे असंतोष को उजागर किया है।

 

आगे की जानकारी की प्रतीक्षा है। प्रशासन और ग्रामीणों के बीच सुलह के प्रयास जारी हैं, लेकिन देखना यह होगा कि इस गतिरोध का समाधान कब और कैसे निकलता है।


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