

धनबाद, झारखंड: मंगलवार, 20 मई 2025 को धनबाद के बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय (बीबीएमकेयू) में एक ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बना, जब झारखंड के गौरव, शिक्षाविद और आंदोलनकारी बिनोद बिहारी महतो की आदमकद प्रतिमा का अनावरण किया गया। इस गरिमामय कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार और विशिष्ट अतिथि के रूप में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन शामिल हुए। यह आयोजन न केवल बिनोद बिहारी महतो के अतुलनीय योगदान को श्रद्धांजलि थी, बल्कि झारखंड में शिक्षा के नए आयामों को छूने की सरकार की प्रतिबद्धता का भी प्रतीक था।

एक भव्य समारोह का आयोजन

पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार, बीबीएमकेयू परिसर में सुबह से ही उत्साह का माहौल था। विश्वविद्यालय के छात्र, शिक्षक, स्थानीय गणमान्य व्यक्ति और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता इस महत्वपूर्ण अवसर पर उपस्थित थे। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई, जिसके बाद राज्यपाल संतोष गंगवार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने संयुक्त रूप से बिनोद बिहारी महतो की भव्य प्रतिमा का अनावरण किया। यह प्रतिमा विश्वविद्यालय परिसर के केंद्र में स्थापित की गई है, जो आने वाली पीढ़ियों को उनके आदर्शों और बलिदान की याद दिलाती रहेगी।
विश्वविद्यालय के कुलपति ने राज्यपाल और मुख्यमंत्री का गर्मजोशी से स्वागत किया और उन्हें स्मृति चिन्ह व शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। इस अवसर पर कई प्रमुख हस्तियां उपस्थित थीं, जिनमें मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, सांसद सीपी चौधरी, विधायक राज सिन्हा, जयराम महतो, अरूप चटर्जी, जयमंगल सिंह, शत्रुघ्न महतो, चंद्रदेव महतो, उमाकांत रजक, मथुरा महतो और पूर्व मंत्री बेबी देवी शामिल थीं। मंच पर उपस्थित इन सभी गणमान्य व्यक्तियों ने बिनोद बिहारी महतो के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का भावुक संबोधन: ‘सरकार आंदोलनकारियों के सपनों को सजाने का काम कर रही है‘
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने संबोधन में बिनोद बिहारी महतो को ‘झारखंड के पुरोधा’ बताते हुए कहा कि इस दिन का उन्हें और पूरे राज्य को लंबे समय से इंतजार था। उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार राज्य के आंदोलनकारियों को सम्मान देने और उनके नाम को सजाने का काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि राज्य की भौगोलिक संरचना के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था के लिए नई-नई पहल की जा रही है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में नए आयाम जोड़ने का काम किया है।
मुख्यमंत्री ने भावुक होते हुए उस पल को याद किया जब उन्होंने 2014 के अपने कार्यकाल में हजारीबाग विश्वविद्यालय से अलग कर कोयलांचल में एक स्वतंत्र विश्वविद्यालय की परिकल्पना की थी। उन्होंने कहा, “आज बिनोद बिहारी महतो विश्वविद्यालय झारखंड के बच्चों के भविष्य को निखारने में निरंतर प्रयासरत है।” उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि झारखंड राज्य एक आंदोलन की उपज है, जिसके लिए मूलवासियों और आदिवासियों ने अपने अधिकारों की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी है। उन्होंने कहा कि बिनोद बिहारी महतो जैसे नेताओं ने ही इस आंदोलन की नींव रखी थी।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि राज्य के अंदर अलग-अलग गली, कस्बों और चौक-चौराहों को हमारे वीर सपूतों के नाम से जाना जाता है। उन्होंने स्वीकार किया कि कई ऐसे चौराहे हैं जो आज भी महापुरुषों की मूर्ति लगने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन आज बिनोद बिहारी महतो का यह सपना पूरा होता दिख रहा है। मुख्यमंत्री ने मंच से लोगों को बिनोद बिहारी महतो के ऐतिहासिक पहलुओं और उनके द्वारा किए गए संघर्षों के बारे में विस्तार से बताया, जिससे उपस्थित जनसमूह प्रेरणा से भर उठा।
राज्यपाल संतोष गंगवार का उद्बोधन: ‘शिक्षा में मौलिकता ही देश की प्रगति का आधार
राज्यपाल संतोष गंगवार ने अपने संबोधन में बिनोद बिहारी महतो को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में झारखंड को और भी आगे ले जाना है। उन्होंने एक व्यक्तिगत संबंध का भी खुलासा किया, जिसमें उन्होंने बताया कि वे बिनोद बिहारी महतो के साथ संसद में रहे हैं और उनके परिवार से भी अच्छी तरह परिचित हैं। राज्यपाल ने कहा कि बिनोद बिहारी महतो की सक्रियता और दूरदर्शी सोच का ही परिणाम है कि उन्होंने समाज में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए अथक प्रयास किए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि बिनोद बिहारी महतो की यह प्रतिमा आने वाली पीढ़ियों को उनके आदर्शों और शिक्षा के प्रति उनके समर्पण की याद दिलाती रहेगी।
राज्यपाल ने उच्च शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए स्वीकार किया कि वर्तमान में राज्य उच्च शिक्षा में अपेक्षित प्रगति नहीं कर पा रहा है। हालांकि, उन्होंने उम्मीद जताई कि बीबीएमकेयू इस दिशा में बेहतर करने का प्रयास करेगा और राज्य को उच्च शिक्षा के मानचित्र पर प्रमुखता से स्थापित करेगा। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा में देश कैसे आगे बढ़े, यह हर नागरिक की चिंता होनी चाहिए। राज्यपाल ने शिक्षा प्रणाली में विभिन्न हितधारकों की भूमिका को भी परिभाषित किया: “विद्यार्थियों का कार्य पढ़ना है, शिक्षक का कार्य उन्हें पढ़ाना है, और अधिकारियों का कार्य है कि वे एक पुल की तरह काम करें, जो शिक्षा के मार्ग को सुगम बनाए।”
उन्होंने जोर देकर कहा कि मौलिकता ही देश की प्रगति में सहायक हो सकती है और हमें विद्यार्थियों को ऐसा वातावरण देना होगा जहां वे अपनी रचनात्मकता और मौलिकता को विकसित कर सकें। राज्यपाल का यह संबोधन शिक्षा के प्रति एक व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है, जिसमें छात्रों, शिक्षकों और प्रशासकों सभी की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला गया।
बिनोद बिहारी महतो: एक दूरदर्शी नेता और शिक्षाविद
बिनोद बिहारी महतो न केवल एक प्रसिद्ध राजनेता थे, बल्कि एक दूरदर्शी शिक्षाविद और सामाजिक सुधारक भी थे। उन्होंने झारखंड आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और एक अलग राज्य के गठन के लिए संघर्ष किया। उन्होंने शिक्षा के प्रसार, विशेष रूप से आदिवासी और पिछड़े समुदायों के बीच, पर विशेष ध्यान दिया। उनके प्रयासों से ही इस क्षेत्र में कई शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना हुई, जिनमें से एक आज उनके नाम पर बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय के रूप में खड़ा है। उनकी दूरदृष्टि ने झारखंड के लोगों के लिए एक उज्जवल भविष्य की नींव रखी।
विश्वविद्यालय का भविष्य और आशाएं:
बीबीएमकेयू में बिनोद बिहारी महतो की प्रतिमा का अनावरण एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह विश्वविद्यालय, जो कोयलांचल क्षेत्र के युवाओं को उच्च शिक्षा प्रदान करने का केंद्र बन गया है, अब बिनोद बिहारी महतो के आदर्शों से और भी अधिक प्रेरित होगा। यह आयोजन छात्रों को उनके इतिहास, संस्कृति और उन महान नेताओं के बारे में जानने के लिए प्रेरित करेगा जिन्होंने उनके भविष्य को आकार दिया।
इस अवसर पर, विश्वविद्यालय प्रशासन ने शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने और छात्रों को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए सशक्त बनाने का संकल्प लिया। राज्यपाल और मुख्यमंत्री दोनों ने विश्वविद्यालय को हर संभव सहायता का आश्वासन दिया ताकि यह उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक उत्कृष्ट केंद्र के रूप में विकसित हो सके।
यह अनावरण समारोह केवल एक प्रतिमा का अनावरण नहीं था, बल्कि झारखंड के गौरवशाली अतीत, उसके वर्तमान प्रयासों और एक उज्जवल भविष्य की आकांक्षा का प्रतीक था। बिनोद बिहारी महतो की विरासत निश्चित रूप से बीबीएमकेयू के छात्रों और शिक्षकों को हमेशा प्रेरित करती रहेगी, जिससे यह विश्वविद्यालय शिक्षा और ज्ञान का एक प्रकाश स्तंभ बन सकेगा।
There is no ads to display, Please add some


Post Disclaimer
स्पष्टीकरण : यह अंतर्कथा पोर्टल की ऑटोमेटेड न्यूज़ फीड है और इसे अंतर्कथा डॉट कॉम की टीम ने सम्पादित नहीं किया है
Disclaimer :- This is an automated news feed of Antarkatha News Portal. It has not been edited by the Team of Antarkatha.com
