
गंगा स्नान करके हमारी पाप मुक्त नहीं होगी। कुंभ में चाहे बीस बार डुबकी लगा लें, वह समाप्त नहीं होगी। पाप मुक्ति का एक ही उपाय है पश्चाताप। भूल मिटाकर उसे मिटा कर अपना प्रेम प्रदान करो। विनती यह स्वीकार करो। पाप अकेले नहीं आता है। पाप का भी एक परिवार होता है। वह एक-एक करके आता है एवं पाप का घड़ा भरता जाता है। यदि एक भी पाप आपके पास आ गया तो वह अपना परिवार बना लेता है। उत्तम पुरुष को चाहिए कि पतन की पहली सीढ़ी पर संभल जाए । जबकि संसार फिसलने के लिए बाध्य करता है।

उपरोक्त बातें श्री राम जन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष एवं प्रसिद्ध कथा व्यास स्वामी गोविंद देव गिरी जी महाराज ने कहीं। स्वामी गोविंद देव गिरि जी महाराज एकल श्रीहरि फाउंडेशन धनबाद द्वारा आयोजित पांच दिवसीय भागवत भक्ति कथा के दूसरे दिन न्यू टाउन हॉल धनबाद में कही।

स्वामी गोविंद देव गिरि जी महाराज ने धनबाद शहर के भक्त श्रोताओं से भक्त ध्रुव का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि नाम की विशेषता है चाहे वह कैसे भी लिया जाए। वह परिणाम दिखाता है । शास्त्र में एक नियम है किसी भी पदार्थ की शक्ति को प्रकट होने के लिए ज्ञान की आवश्यकता नहीं होती है। कांटा को चूमना उसका स्वभाव है।
वस्तु अपना स्वभाव दिखाती है। वह प्रकट होती है , कोविड के समय कोई जान-बूझकर मरने थोड़े ही जाता था। वायरस की वह शक्ति थी जिससे लोग मर रहे थे। भगवान का नाम कैसे भी ले वह लाभ करेगा ही यह भगवान के नाम का स्वभाव का फल है।
स्वामी जी ने ध्रुव प्रसंग सुनाते हुए कहा कि -तेरे नाम अनेक तू एक ही है,तेरे रूप अनेक तू एक ही है।
हर देश में तू हर वेश में तू ,
तेरा नाम अनेक तू एक ही है।
स्वामी जी ने कहा कि जो व्यक्ति देवताओं में अलग-अलग भिन्नता देखता है उन्हें शांति प्रदान नहीं होता है। ब्रह्म,विष्णु,महेश तीनों रूप एक ही है। सनातन के इस मूल सिद्धांत को भूलना मत। परमात्मा एक ही है। परमात्मा अपने भक्तों की इच्छा के अनुरूप भक्तों को जो रूप अच्छा लगता है वह रूप परमात्मा धरण कर लेते हैं।
5 वर्षीय ध्रुव प्रसंग की कथा सुनते हुए स्वामी जी ने कहा की अपेक्षित घरों के बच्चे जल्दी परिपक्व हो जाते हैं। बड़े घरों के बच्चे जल्दी परिपक्व नहीं होते हैं। अपेक्षित बच्चे जल्दी सब कुछ समझ जाते हैं। जिनके कोई नहीं होते हैं उनके भगवान हुआ करते हैं। स्वामी जी ने कहा कि संसार से जाना ही जाना है
कुछ लोग मृत्यु को जीत कर जाते हैं तो कुछ लोग मृत्यु को श्राद्ध में जाते हैं। ध्रुव मृत्यु को जीत कर जाते हैं। संसार को मानना गलत है। एक दिन संसार छूटेगा। कितना भी संसार को पकड़ो। स्थाई रूप से भगवान को मन में लगाना है। मेरे श्री भगवान है भगवान से बांधो। जीवन में सिर्फ यह खाने लगे तो जीवन का उद्घार हो जाएगा-
श्री बांके बिहारी नंदलाल मेरो है,
गोविंद मेरो है गोपाल मेरो हैं ,
श्री बांके बिहारी नंदलाल मेरो है।
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