
आज की कथा में महाराज श्री ने भक्तों को बताया कि जब मानव का मन निर्मल और शुद्ध होता है, तब उसकी सारी बाधाएं स्वतः दूर हो जाती हैं।
मानव को अपने जीवन में कभी अहंकार नहीं करना चाहिए। अहंकार न केवल इंसान को दूसरों से दूर करता है, बल्कि उसे ईश्वर से भी अलग कर देता है।

विनम्रता और भक्ति का मार्ग अपनाने से ही व्यक्ति सच्ची आध्यात्मिक उन्नति कर सकता है।

सनातन धर्म की न केवल मानवता की सेवा करता है, बल्कि सभी धर्मों का आदर और सम्मान भी करता है। यही कारण है कि सनातन धर्म को सार्वभौमिक और सर्वसमावेशी धर्म माना जाता है।
भगवान की प्राप्ति के लिए कथा एक माध्यम बन सकती है। कथा सुनने और उसमें मन लगाने से मनुष्य अपने कर्मों को सुधारने और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा प्राप्त करता है।
हमें अपने बच्चों को बचपन से ही कथा श्रवण करवाना चाहिए। यह उनके चरित्र निर्माण में सहायक होता है और उन्हें जीवन में धर्म और सच्चाई के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करता है।प्रमुख परिवार किशोरी गुप्ता, बिजय झा ,अशोक वर्मा,विनय कृष्ण गुप्ता,बिजया गुप्ता, श्रीकृष्ण गुप्ता ,अवधेश कु गुप्ता,मनोज कु गुप्ता,उदय वर्मा,सुशील खैतान,संजय चौधरी, सुमन चौधरी,हिम्मत सिंह,दीपक सोनी,संजय गुप्ता,शिवानी झा,कस्तूरी देवी,गीता देवी,अल्का देवी बबीता देवी,नर्मदा देवी, मनिषा देवी,कविता गुप्ता,उ सुष्मा वर्मा,माया खैतान,बिकास साहू, सुमन देवी, आदि सभी समाज के सहयोग से किया जा रहा है।
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