
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश गैंगस्टर्स और असामाजिक गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम कठोर है। शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी इलाहाबाद हाईकोर्ट के पिछले साल मई में दिए आदेश को चुनौती वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए दी। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की अधिनियम के तहत दर्ज मामले में कासगंज की जिला अदालत में उसके खिलाफ लंबित कार्यवाही रद्द करने की मांग खारिज कर दी थी। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने अपील स्वीकार करते हुए कहा, हम इस पर विचार करेंगे। पिछले साल नवंबर में मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार और अन्य से याचिका पर जवाब मांगा था। शीर्ष अदालत ने तब अंतरिम आदेश के तहत याचिकाकर्ता के विरुद्ध गैंगस्टर अधिनियम के तहत कोई दंडात्मक कार्रवाई करने से रोक दिया था। सुनवाई के दौरान बुधवार को याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि गंगा नदी में अवैध खनन के आरोप में 1986 के अधिनियम के प्रावधानों के तहत उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। वकील ने दलील दी कि इससे पहले अवैध खनन से जुड़ी एक और एफआईआर दर्ज की गई थी। एक ही आरोप में दो बार मामले दर्ज किए गए। राज्य के वकील ने 1986 के अधिनियम के प्रावधानों का हवाला दिया।
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