
सरायकेला: चांडिल बांध विस्थापितों ने अपने अधिकारों की रक्षा और विभिन्न जन समस्याओं के समाधान के लिए अधीक्षण अभियंता को 11 सूत्री ज्ञापन सौंपा। चांडिल बाँध विस्थापित मत्स्यजीवी स्वाबलंबी सहकारी समिति द्वारा 2006 से नौका बिहार (बोटिंग) का संचालन समिति के अध्यक्ष नारायण गोप और सचिव श्यामल मार्डी कर रहे थे।

आज, विस्थापित मुक्ति वाहिनी के बैनर तले श्यामल मार्डी और नारायण गोप के नेतृत्व में महिला और पुरुष धरना प्रदर्शन पर बैठे। उनका मुख्य विरोध झारखंड सरकार के पर्यटन विभाग द्वारा विस्थापितों से नौका परिचालन का अधिकार छीनकर गिरिडीह की एक निजी एजेंसी को सौंपने को लेकर था। विस्थापितों का कहना है कि यह पुनर्वास नीति 2012 का खुला उल्लंघन है, जिसमें स्पष्ट है कि जलाशय क्षेत्र में मत्स्य उद्योग और पर्यटन उद्योग संबंधी संभावनाओं में विस्थापितों को संबद्ध किया जाएगा।

विस्थापितों के अनुसार, चांडिल बांध में नौका विहार का संचालन अधिकार उन्हें लंबे संघर्ष के बाद पुनर्वास हक के रूप में मिला है। उन्होंने यह भी बताया कि चांडिल जलाशय में अभी तक एफआरएल (Full Reservoir Level) स्तर तक जल भण्डारण नहीं हुआ है, ऐसे में किसी निजी एजेंसी को नौका परिचालन के लिए अधिकृत करना अवैधानिक है।
ज्ञापन में पर्यटन विभाग द्वारा निकाले गए नौकायान निविदा को रद्द करने, जिला मत्स्य पदाधिकारी की मनमानी रोकने, लंबित पुनर्वास दायित्वों को पूरा करने, डिमना में नए बस स्टैंड में दुकानें बनाकर विस्थापित परिवारों को देने, आवासीय विद्यालय खोलने, पुनर्वास स्थलों का सीमांकन कर मालिकाना हक देने, बांध के पिछले इलाके में लिफ्ट इरीगेशन और डीप बोरिंग की व्यवस्था करने, पालना जलाशय योजना पूरी करने, सरकारी नौकरियों में नियुक्ति देने, चांडिल जलाशय के विभिन्न घाटों का पर्यटन विकास करने और सभी विकास पुस्तिकाओं में कृतज्ञता पैकेज देने जैसी मांगें शामिल हैं। इस अवसर पर सैकड़ों महिलाएं और पुरुष उपस्थित थे।
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