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Saraikela : छऊ हमारी पहचान, इसे वैश्विक मंच तक पहुंचाना ही सच्ची श्रद्धांजलि: मनोज चौधरी

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BySubhasish Kumar

Apr 10, 2026
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सरायकेला: परिमार्जित सरायकेला छऊ शैली के जनक स्वर्गीय कुंवर विजय प्रताप सिंह देव की स्मृति में शुक्रवार को छऊ कला केंद्र, सरायकेला में एक भावनात्मक, गौरवपूर्ण और ऐतिहासिक क्षण देखने को मिला, जब उनकी प्रतिमा का विधिवत अनावरण नगर पंचायत अध्यक्ष श्री मनोज कुमार चौधरी द्वारा किया गया। इस अवसर पर उनके सुपुत्र कामाख्या सिंह देव भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में छऊ कला से जुड़े वरिष्ठ कलाकार, युवा प्रतिभाएं, बुद्धिजीवी, सामाजिक कार्यकर्ता तथा बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक शामिल हुए। पूरा परिसर पारंपरिक संस्कृति और गौरव के भाव से ओत-प्रोत नजर आया।
प्रतिमा के अनावरण होते ही उपस्थित लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ इस महान विभूति को श्रद्धांजलि अर्पित की।
स्वर्गीय कुंवर विजय प्रताप सिंह देव का जन्म वर्ष 1896 में हुआ था। वे सरायकेला राजपरिवार से जुड़े एक दूरदर्शी, कला प्रेमी और सांस्कृतिक संरक्षक थे। उन्होंने छऊ नृत्य को केवल एक लोक परंपरा तक सीमित नहीं रहने दिया, बल्कि उसे एक सुसंगठित, परिमार्जित और मंचीय स्वरूप प्रदान किया। उनके प्रयासों से सरायकेला छऊ शैली में नृत्य की बारीकियों, भाव-भंगिमाओं, संगीत और वेशभूषा में अभूतपूर्व परिपक्वता आई।
उन्होंने कलाकारों को प्रशिक्षण देने, छऊ नृत्य को संरक्षित करने तथा उसे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यही कारण है कि आज सरायकेला छऊ को देश-विदेश में विशिष्ट और सम्मानजनक स्थान प्राप्त है। वर्ष 1951 में उनके निधन के बाद भी उनकी विरासत निरंतर जीवित है और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित कर रही है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नगर पंचायत अध्यक्ष श्री मनोज कुमार चौधरी ने कहा,
“कुंवर विजय प्रताप सिंह देव ने जिस समर्पण, दूरदृष्टि और सांस्कृतिक चेतना के साथ सरायकेला छऊ को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया, वह हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है। आज हमारी जिम्मेदारी है कि हम इस अमूल्य विरासत को न सिर्फ संजोकर रखें, बल्कि इसे वैश्विक मंच तक पहुंचाएं—यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।”
उन्होंने आगे कहा कि नगर पंचायत छऊ कलाकारों के सम्मान, संरक्षण और उनके आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तिकरण के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। आने वाले समय में छऊ कला के प्रचार-प्रसार, प्रशिक्षण और आयोजन को लेकर कई विशेष योजनाएं तैयार की जा रही हैं, ताकि यह परंपरा और अधिक सशक्त रूप में आगे बढ़ सके।
इस अवसर पर यह भी उल्लेख किया गया कि कुछ लोग दुर्भावनावश बेबुनियाद टिप्पणियां कर रहे हैं, जबकि पूरे कार्यक्रम में किसी भी कलाकार में कोई नाराजगी नहीं थी। इस प्रकार की नकारात्मक और घटिया टिप्पणियां कलाकारों एवं कला प्रेमियों को हतोत्साहित करती हैं तथा सरायकेला की छवि को भी नुकसान पहुंचाती हैं। सभी से सकारात्मक सहयोग और सांस्कृतिक एकता बनाए रखने की अपील की गई।
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने महान विभूति को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उनके योगदान को स्मरण किया और संकल्प लिया कि सरायकेला छऊ की इस समृद्ध परंपरा को आने वाली पीढ़ियों तक पूरी गरिमा और सम्मान के साथ पहुंचाया जाएगा।
मौके पर नगर पंचायत के उपाध्यक्ष अविनाश कवि, भोला मोहंती, कार्यपालक पदाधिकारी समीर बोदरा तथा नगर क्षेत्र के सभी वार्ड पार्षद उपस्थित थे।

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