
सरायकेला। 15 जनवरी को ‘अखान्ना यात्रा’ (अखंड यात्रा) के पावन अवसर पर सरायकेला स्थित खरकई नदी के तट पर श्रद्धा और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। माता झुमकेश्वरी के प्रति अपनी अटूट आस्था प्रकट करने के लिए न केवल झारखंड, बल्कि पड़ोसी राज्यों बिहार, बंगाल और ओडिशा के दूर-दराज क्षेत्रों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहाँ पहुंचे।
सामाजिक एकता का प्रतीक है यह यात्रा
अनुसूचित जाति एकता मंच के जिला अध्यक्ष रंजन कांरवा ने इस यात्रा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि ‘अखान्ना यात्रा’ का इस समाज में विशेष स्थान है। उन्होंने कहा कि कांरवा समाज, दलित समाज और मुखी समाज के लोग पीढ़ी दर पीढ़ी इस दरबार से जुड़े हुए हैं। मान्यता है कि माता के दरबार में मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है।
मन्नत पूरी होने पर दी जाती है बलि

परंपरा के अनुसार, श्रद्धालु अपनी मन्नतें पूरी होने की खुशी में और माता का आभार प्रकट करने के लिए बकरा, मुर्गा और बत्तख की बलि चढ़ाते हैं। सुबह से ही खरकई नदी के किनारे श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटी रही, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय माहौल में डूबा नजर आया। श्रद्धालुओं का मानना है कि माता का आशीर्वाद उनके परिवार और समाज में सुख-समृद्धि लाता है।
अंतरराज्यीय जुड़ाव और प्रमुख उपस्थिति
यह यात्रा अब केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि अंतरराज्यीय सामाजिक एकता का भी प्रतीक बन गई है।

इस अवसर पर सरायकेला नगर पंचायत के पूर्व उपाध्यक्ष श्री मनोज चौधरी ने भी माता झुमकेश्वरी की पूजा-अर्चना की और अनुसूचित जाति समाज के साथ मिलकर क्षेत्रवासियों की सुख-शांति की कामना की।
मौके पर मुख्य रूप से आनंद मुखी, गुरु चरण कारवां, वरुण मुखी, सुदर्शन मुखी, रविशंकर मुखी, आनंद कारवां उपस्थित रहे।
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