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भूषण पहाड़िया जेल से रिहा: पारंपरिक जांताल पूजा स्थल बचाने का संघर्ष जारी

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Jul 8, 2025

 

 

 

सरायकेला, सरायकेला जिले के चांडिल थाना क्षेत्र स्थित आसनबनी पंचायत के बिरिगोड़ा गांव के पारंपरिक लाया, भूषण पहाड़िया, को एक महीने नौ दिन बाद जेल से रिहा कर दिया गया है। उनकी रिहाई पर समर्थकों और स्थानीय समुदाय के लोगों ने गहरी राहत और खुशी जाहिर की है। भूषण पहाड़िया को पारंपरिक जांताल पूजा स्थल को बचाने के लिए चल रहे उनके संघर्ष के दौरान सत्ता पक्ष और भू-माफिया सिंडिकेट द्वारा कथित तौर पर एक झूठे मुकदमे में फंसाकर जेल भेज दिया गया था।

जेल से बाहर आते ही भूषण पहाड़िया का उनके समुदाय के सदस्यों ने गर्मजोशी से स्वागत किया और फूलों की माला पहनाई।

 

इस अवसर पर समुदाय के लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई, और भूषण पहाड़िया ने स्कूल के बच्चों के बीच चॉकलेट भी बांटी।

पूर्वजों की विरासत बचाने का संकल्प

भूषण पहाड़िया अपने पूर्वजों द्वारा स्थापित पारंपरिक जांताल पूजा स्थल को बचाने के लिए लगातार संघर्षरत रहे हैं। यह संघर्ष सत्ता पक्ष और भू-माफिया सिंडिकेट के खिलाफ उनकी लड़ाई का हिस्सा है। झूठे मुकदमे और जेल की सजा के बावजूद, भूषण पहाड़िया ने अपने दृढ़ संकल्प को नहीं छोड़ा।

 

उन्होंने स्पष्ट किया कि भले ही उन्हें डराने, लालच देने, झूठे मुकदमे दर्ज करने या जेल में बंद करने का प्रयास किया गया हो, वे अपनी पारंपरिक जांताल पूजा स्थल को किसी को भी कब्जा नहीं करने देंगे।

समुदाय का अटूट समर्थन

भूषण पहाड़िया के संघर्ष में उनके समुदाय के लोगों ने एकजुटता और अटूट समर्थन दिखाया है। छत्र पहाड़िया, मंगल पहाड़िया, गणेश पहाड़िया, जागरण पाल, गिडू माझी, चेतन पहाड़िया, जीतू पहाड़िया, बुधनी पहाड़िया, गुरुचरण कर्मकार, गुरवा पहाड़िया, सोमवारी पहाड़िया, भारती पहाड़िया, बासंती पहाड़िया, सूर्य मोहन सिंह सरदार, गुरुचरण पहाड़िया सहित कई अन्य लोग उनकी रिहाई के समय मौजूद थे और उन्होंने भूषण पहाड़िया के संघर्ष को जारी रखने के लिए अपना समर्थन और सहयोग व्यक्त किया।

 

आगे की राह: संरक्षण और समाधान

अब आगे की चुनौती पारंपरिक जांताल पूजा स्थल की सुरक्षा और संरक्षण के लिए प्रभावी कदम उठाना है। समुदाय के लोगों और भूषण पहाड़िया को मिलकर इस महत्वपूर्ण मुद्दे का स्थायी समाधान खोजने की आवश्यकता है ताकि उनकी सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को सुरक्षित रखा जा सके।


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