
धनबाद, 13 मई 2025: विश्वविख्यात आध्यात्मिक गुरु और आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक गुरुदेव श्री श्री रविशंकर जी का 69वां जन्मदिवस आज धनबाद में बड़ी ही सादगी, श्रद्धा और भक्ति के माहौल में मनाया गया। यह अवसर न केवल गुरुदेव के जन्मदिन का प्रतीक था, बल्कि यह विश्व शांति, सामूहिक साधना और निस्वार्थ सेवा की भावना को समर्पित एक महत्वपूर्ण दिन भी था।

दिन की शुरुआत सुबह 7 बजे सामूहिक साधना, ध्यान और आर्ट ऑफ लिविंग की प्रसिद्ध श्वास तकनीक सुदर्शन क्रिया के साथ हुई। इस आध्यात्मिक सत्र में धनबाद और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में साधक एकत्रित हुए। सभी ने गुरुदेव के स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की कामना की और देश की उन्नति एवं कल्याण के लिए सामूहिक रूप से ध्यान किया। इस शांत और ऊर्जावान वातावरण में सभी ने गहरी शांति और सकारात्मकता का अनुभव किया।

दिन के दूसरे भाग में, शाम 6 बजे एक विशेष आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस सत्र में ध्यान के साथ-साथ भगवान शिव के शक्तिशाली मंत्र ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप किया गया, जिससे वातावरण भक्तिमय हो गया। इसके पश्चात एक भक्ति सत्संग का आयोजन हुआ, जिसमें मधुर भजनों और गुरुदेव की शिक्षाओं का श्रवण कर उपस्थित जन भावविभोर हो उठे। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण गुरु पूजा रही, जिसमें श्रद्धालुओं ने गुरुदेव के प्रति अपनी कृतज्ञता और श्रद्धा अर्पित की। इस आध्यात्मिक মিলন ने सभी को एक गहरे आंतरिक अनुभव से जोड़ा।
कार्यक्रम के समापन पर, उपस्थित 200 से अधिक प्रतिभागियों के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। यह स्नेह और एकता का प्रतीक था, जिसने कार्यक्रम में शामिल सभी लोगों को आपस में जोड़ा।
इस पूरे कार्यक्रम का कुशल आयोजन आर्ट ऑफ लिविंग के फैकल्टी सदस्य मयंक सिंह, सोनाली सिंह और सोनी कुमारी ने मिलकर किया। इस महत्वपूर्ण कार्य में कुंदन कुमार, पंकज सिंह, ऋत्विक दुदानी और मेधा दुदानी जैसे सक्रिय स्वयंसेवकों ने अपना बहुमूल्य योगदान दिया।कार्यक्रम की सफलता में श्री बिनोद तुलस्यान, प्राचार्य सुमंत मिश्रा, स्वाति टंडन, अनिल बर्नवाल, गौरी शंकर, सुतापा मंडल, अरुमिका घोष, राजेश टंडन, रामाधार प्रसाद, अन्नपूर्णा दास, रंजिता प्रसाद, अपर्णा दास, साक्षी अग्रवाल और प्ररुप सिंह आदि सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
गुरुदेव श्री श्री रविशंकर जी का यह 69वां जन्मदिवस धनबाद में न केवल एक उत्सव के रूप में मनाया गया, बल्कि इसने गुरुदेव के महान विचारों और शिक्षाओं को जन-जन तक पहुंचाने का भी कार्य किया। इस अवसर ने लोगों को आंतरिक शांति, सामूहिक चेतना और निस्वार्थ सेवा के महत्व से अवगत कराया, जिससे समाज में सकारात्मकता और भाईचारे की भावना को और अधिक बल मिला। सादगी और श्रद्धा से परिपूर्ण यह आयोजन निश्चित रूप से सभी उपस्थित लोगों के हृदय में एक अमिट छाप छोड़ गया।
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