
देवघर, झारखंड: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), देवघर के पहले दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। इस समारोह में उन्होंने वर्ष 2019 बैच के मेधावी छात्रों को उनकी डिग्री और पदक प्रदान किए। इस अवसर पर उन्होंने संस्थान के शिलान्यास से लेकर पहले दीक्षांत समारोह तक की अपनी यात्रा को एक भावनात्मक क्षण बताया।

राष्ट्रपति ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि पदक विजेताओं में छात्राओं की संख्या अधिक थी, जिसे उन्होंने गर्व का विषय बताया। डॉ. अस्मित अग्रवाल को गोल्ड मेडल, डॉ. तनिष्क कुमार को सिल्वर और डॉ. हर्षवीन कौर को ब्रोंज मेडल से सम्मानित किया गया।

अपने संबोधन में, राष्ट्रपति ने भावी डॉक्टरों को केवल कुशल चिकित्सक नहीं, बल्कि संवेदनशील इंसान बनने की सलाह दी। उन्होंने डॉक्टरों में नैतिकता, करुणा और परोपकार की भावना पर जोर दिया। उन्होंने एम्स देवघर द्वारा 5 आदिवासी गांवों को गोद लेने की सराहना की और इस पहल का विस्तार करने का सुझाव दिया। उन्होंने झारखंड में लड़कियों की कम उम्र में शादी और एनीमिया जैसी समस्याओं पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया, जिसमें डॉक्टरों का मार्गदर्शन ग्रामीण स्वास्थ्य में सुधार ला सकता है।
राष्ट्रपति ने एम्स देवघर को ‘सेंटर ऑफ कंपीटेंस फॉर ट्राइबल हेल्थ’ के रूप में मान्यता मिलने पर खुशी जताई और जनजातीय स्वास्थ्य पर शोध के लिए फैकल्टी सदस्यों की सराहना की। उन्होंने सतत विकास लक्ष्यों (SDG) के तहत स्वास्थ्य सुधार के लिए एक रूपरेखा तैयार करने का आग्रह किया।
यह समारोह एम्स देवघर के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ, जिसने न केवल अपने पहले बैच के छात्रों को विदाई दी, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को भी मजबूत किया। इस समारोह में झारखंड के राज्यपाल और स्वास्थ्य मंत्री सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। राष्ट्रपति मुर्मू दो दिवसीय झारखंड दौरे पर थीं, जिसके बाद वह रांची पहुंचीं।
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