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राष्ट्रीय फलक पर दर्ज होगा रामायण काल से जुड़े सीतामढ़ी का नाम

ByBiru Gupta

Dec 10, 2024

 

रिपोर्ट :- अजय गुप्ता

मेसकौर (नवादा):-जिले के सुदरवर्ती प्रखंड स्थित सतामढ़ी रामायण काल से जुड़ा हुआ स्थल है। परंतु आज तक सीतामढ़ी को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित नहीं किया गया है। हालांकि जिले के प्रबुद्ध लोग आज भी प्रयासरत हैं।

 

रविवार को सीतामढ़ी को अंतरराष्ट्रीय फलक पर पर्यटन स्थल के रूप में प्रतिष्ठित करने का अभियान को तब एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई जब पड़ोसी देश नेपाल सहित भारत के विभिन्न 14 राज्यों और 20 से अधिक विश्वविद्यालयों के शोधकर्ताओं और लेखकों ने सीतामढ़ी पहुंचकर रामायणकालीन संदर्भों की जानकारी ली।

 

स्थानीय लोगों ने साहित्य मनिषीयों का गर्म जोशी से स्वागत किया।

बड़ौदा विश्वविद्यालय गुजरात में सैंकड़ों प्रमाणिक शोधार्थियों को निर्देशित करने वाले डॉक्टर कनु भाई निनामा, राजस्थान की बड़ी साहित्यकार सरिता गर्ग सरी, हरियाणा के साहित्यकार डॉ त्रिलोक चंद्र, सिहोरा राजस्थान कि लेखिका डॉ अरुण पांडे, जोधपुर के लेखक डॉ राजेन्द्र पुरोहित सहित सभी लेखकों और शोधकर्ताओं ने सीतामढ़ी के पौराणिक तथ्यों को महत्वपूर्ण बताते हुए इसे साहित्य के लिए प्रमुख विषय वस्तु बताया।

 

लेखकों ने अपने संस्मरण में शामिल करने के लिए स्थानीय लोगो से इलाके के बारे में भी परिचय लिया। सीतामढ़ी में आये साहित्यकार हिसुआ के अशोक स्मृति संस्थान और साहित्य प्रेरणा मंच द्वारा राजगीर के वीरायतन में आयोजित मगध साहित्य प्रेरणा उत्सव में प्रतिभाग करने आयें थे।

 

आयोजन समिति के संयोजक कवि ओंकार शर्मा कश्यप, अध्यक्ष जितेंद्र राज आर्यन, कलाकार व साहित्यकार देवेन्द्र विश्वकर्मा, चिकित्सक शैलेन्द्र प्रसून,विवेक कुमार सहित जिले के प्रबुद्ध नागरिकों कि अगुवाई में 3 दिवसीय आयोजन किया गया था। जहां लेखकों से सीतामढ़ी और ककोकलत को रचनाकर्म में शामिल करने का आग्रह किया गया था।

 

लेखकों ने इसे सहर्ष स्वीकार करते हुए ककोलत और सीतामढ़ी का दौरा किया। सीतामढ़ी में लेखकों के दल ने प्रसिद्ध गुफा मां जानकी मंदिर, लव-कुश मंदिर, रसलपूरा के पहाड़ स्थित पौराणिक अश्वबंधन खुंटा,बारत टाल स्थित महर्षि वाल्मीकि कुटिया आदि का दर्शन किया।

 

स्थानीय पुजारी सीताराम पाठक ने लेखक को सीतामढ़ी में मौजूद पौराणिक साक्ष्य भाग्नाअवशेष आदि से संबंधित पौराणिक मान्यताओं के बारे में बताया तथा आसपास के इलाके में मौजूद गांवों से जुडी मान्यताओं पर प्रकाश डाला। लेखकों ने कहा कि यहां मौजूद साक्ष्य बेहद महत्वपूर्ण है आश्चर्य होता है कि इतने महत्वपूर्ण स्थल को ऐसे उपेक्षित क्यों रखा गया है। साहित्य और इतिहास से जुड़े लोगों का दायित्व है कि इस पर अपनी लेखनी चलाकर अपनी रचना धर्म का पालन करें। मगध कि भूमि पौराणिक महत्व कि भूमि है और ककोकलत तथा सीतामढ़ी के भ्रमण के बाद हम सभी अभिभूत हैं।.

 

मौके पर प्रमोद कुमार, डॉक्टर शैलेश कुमार, मुन्ना राजवंशी, शंकर चौहान, पवन कुमार,सौरभ कुमार एवं श्रवण कुमार, उपेंद्र राजवंशी, शनि कुमार सहित सैकड़ो लोग उपस्थित थे।


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