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सामाजिक न्याय के पक्षधर थे बाबा साहब :राहुल

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Byadmin

Apr 14, 2025

 

रिपोर्टिंग बालमुकुंद दास केरेडारी प्रखंड जिला हजारीबाग झारखंड।

 

 

संविधान निर्माता, सोशल इंजीनियरिंग के प्रणेता,शोषित समाज के मसीहा,सिंबल ऑफ नॉलेज कहे जाने वाले बाबा साहब डॉ भीम राव आंबेडकर की 134 जयंती 14 अप्रैल को भारत के साथ साथ पूरे विश्व में धूमधाम से मनाई गई। बाबा साहब अपने जीवन काल में काफी संघर्ष किए और अपना सारा जीवन शोषित समाज को समर्पित कर दिए।डॉ. भीमराव आंबेडकर न केवल भारत के संविधान निर्माता थे, बल्कि वे एक दूरदर्शी समाज सुधारक भी थे, जिनका उद्देश्य एक ऐसे समाज का निर्माण करना था जहाँ सभी को बराबरी का दर्जा मिले।

डॉ. भीम राव आंबेडकर के विचार मुख्य रूप से सामाजिक न्याय, समानता, शिक्षा, और आर्थिक सशक्तिकरण पर केंद्रित थे। वे जाति व्यवस्था के घोर विरोधी और वंचित वर्गों के उत्थान, और एक भेदभाव से रहित समाज के समर्थक थे। उनके प्रसिद्ध नारे “शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो” ने शिक्षा और संगठन के माध्यम से आत्मनिर्भरता पर जोर दिया। इसके अलावा, उन्होंने आर्थिक समानता और श्रमिक अधिकारों की भी वकालत की।बाबा साहब के विचार आज भी प्रासंगिक हैं, खासकर जब हम सामाजिक समरसता, शिक्षा और आर्थिक अवसरों की बात करते हैं। उनकी जयंती न केवल उनके योगदान को याद करने का अवसर है, बल्कि उनके विचारों को आत्मसात करने और समाज में समानता की दिशा में काम करने की प्रेरणा भी देती है।


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