
पटना: केन्द्रीय कैबिनेट ने बीते गुरुवार को वन नेशन-वन इलेक्शन से जुड़े विधेयक के प्रारूप को मंजूरी दे दी। विधेयक के प्रारूप को मंजूरी मिलने के बाद सियासी बयानबाजियों का दौर भी तेज हो गया है। एक ओर जहां एनडीए गठबंधन में शामिल दलों ने इसका समर्थन किया है। वहीं, विपक्षी गठबंधन के नेताओं ने इसे फेडरल स्ट्रक्चर पर हमला बताया है। वहीं इस मुद्दे पर चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर ने भी अपना पक्ष रखा है।

जन सुराज पार्टी के नेता प्रशांत किशोर ने वन नेशन वन इलेक्शन को समर्थन दिया है। प्रशांत किशोर ने ‘वन नेशन वन इलेक्शन’ को देश के लिए फायदेमंद बताया है। उन्होंने कहा है कि मेरा मानना है अगर इसे सही नीयत से लागू किया जाए तो देश के लिए काफी फायदेमंद होगा।

उन्होंने अपने अनुभव के आधार पर कहा कि हर साल देश की करीब एक चौथाई जनता मतदान करती है। इस वजह से सरकार चलाने वाले लोग ज्यादातर समय चुनाव के चक्र में फंसे रहते हैं। उन्होंने कहा कि इस कानून के लागू करने के लिए चार-पांच साल का वक्त दिया जाना चाहिए।
पीके ने आगे कहा कि पिछले 50 सालों से चली आ रही चुनाव प्रक्रिया को 1 दिन में नहीं बदला जा सकता। सरकार को सभी पार्टियों को विश्वास में लेके इसे अगले चार से पांच सालों में इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करना होगा। देश की जनता भी धीरे-धीरे इस प्रक्रिया को स्वीकार कर लेगी। इतने बड़े बदलाव को 1 दिन में जमीन पर नहीं उतरा जा सकता।
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