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प्रशांत किशोर का विधानसभा मार्च, पुलिस से झड़प और सरकार पर तीखे आरोप

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Jul 24, 2025

लखीसराय जिला से सुजीत कुमार की रिपोर्ट:

 

पटना में जन सुराज अभियान के संयोजक प्रशांत किशोर को बुधवार को उनके समर्थकों के साथ बिहार विधानसभा की ओर मार्च करने के दौरान चितकोहरा गोलंबर पर पुलिस ने रोक दिया। इस दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच झड़प भी हुई, जिसमें पुलिस ने समर्थकों पर लाठीचार्ज किया। प्रशांत किशोर का कहना है कि वे “झूठी और विफल सरकार” के खिलाफ 1 करोड़ लोगों के हस्ताक्षर के साथ लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराना चाहते थे।

 

सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

 

प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार आम जनता की आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन अब एक निर्णायक लड़ाई की शुरुआत है और अगले तीन महीनों में वे जन समर्थन के बल पर सरकार की नीतियों को बेनकाब करेंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री, राज्यपाल और विधानसभा अध्यक्ष से मिलने का समय मांगा था, लेकिन उन्हें नहीं दिया गया। प्रशांत किशोर ने बताया कि राज्यपाल ने एक बार समय दिया भी था, लेकिन उसे रद्द कर दिया गया और अब वे अपने प्रधान सचिव से मिलने को कह रहे हैं।

 

प्रशांत किशोर ने कहा कि एक करोड़ लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं और वे शांतिपूर्वक इन कागजात को सरकार को सौंपना चाहते हैं, लेकिन उन्हें मिलने नहीं दिया जा रहा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर उनसे नहीं मिला गया, तो वे उनके दरवाजे तक जाएंगे। उन्होंने सरकार पर 94 लाख लोगों को 2-2 लाख रुपये देने का वादा पूरा न करने का भी आरोप लगाया और कहा कि या तो सरकार यह वादा पूरा करे या लोगों से माफी मांगे।

 

चुनाव आयोग और नागरिकता पर सवाल

 

प्रशांत किशोर ने हाल ही में उनके खिलाफ उठे सवालों के संदर्भ में कहा कि “नागरिकता तय करना चुनाव आयोग का अधिकार नहीं है”। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल बीजेपी और एनडीए के लोग चुनाव आयोग की मदद से समाज के उन लोगों का नाम वोटर लिस्ट से हटाने की कोशिश कर रहे हैं जो उनके विरोधी हैं, जिनमें प्रवासी मजदूर, गरीब लोग और सरकार से नाखुश लोग शामिल हैं। उनका मानना है कि बिहार में लोकतंत्र की जड़ें काफी मजबूत हैं और जनता जागरूक है। उन्होंने हर व्यक्ति से अपने अधिकार के लिए खड़े होने और मतदान करने का आह्वान किया।

 

उन्होंने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला बिल्कुल साफ है कि चुनाव आयोग को किसी की नागरिकता तय करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने लोगों से अपील की कि अगर चुनाव आयोग उनका नाम काट रहा है तो वे इसके खिलाफ खड़े हों और यदि मदद की जरूरत हो तो किसी भी राजनीतिक दल से सहयोग लें।

 

आगे की रणनीति और चेतावनी

 

प्रशांत किशोर ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि “एक लाख आदमी आकर घेर लेंगे तो इन लोगों का निकलना मुश्किल हो जाएगा।” उन्होंने दोहराया कि चाहे जो हो, वे विधानसभा में जाकर मिलेंगे और अगर वहां नहीं मिले तो घर में जाकर मिलेंगे। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि “देखते जाइए कौन-कौन सा रंग बदलता है अभी तो शुरुआत है।” उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि नवंबर में नीतीश सरकार यानी एनडीए की सरकार को जाने से कोई नहीं रोक सकता है।

 

कुल मिलाकर, प्रशांत किशोर का यह मार्च सरकार के खिलाफ एक बड़े विरोध प्रदर्शन का संकेत है, जिसमें उन्होंने लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन, चुनावी प्रक्रियाओं में कथित धांधली और अधूरे सरकारी वादों जैसे गंभीर मुद्दे उठाए हैं। यह देखना होगा कि आने वाले समय में यह आंदोलन क्या रूप लेता है।


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