
(पटना कार्यालय)

पटना में, शिक्षक पात्रता परीक्षा (एसटीईटी) और बिहार शिक्षक पात्रता परीक्षा (बीटीईटी) के उम्मीदवारों के साथ-साथ लाइब्रेरियन के पदों के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों ने सोमवार को अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया।

ये अभ्यर्थी परीक्षा आयोजित करने और नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने की मांग कर रहे थे।
यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण शुरू हुआ, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने विधानसभा की ओर मार्च करने की कोशिश की, जिससे तनाव बढ़ गया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की, लेकिन जब वे नहीं रुके, तो पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए उन पर लाठीचार्ज किया और पानी की बौछारें भी कीं।
इस घटना में कई प्रदर्शनकारी घायल हो गए। कुछ लोगों को मामूली चोटें आईं, जबकि कुछ को गंभीर चोटें आईं और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। पुलिस का कहना है कि उन्होंने आत्मरक्षा में और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बल का प्रयोग किया।
इस घटना के बाद, विपक्षी दलों ने सरकार की आलोचना की। उन्होंने पुलिस कार्रवाई को अनुचित और अलोकतांत्रिक बताया। विपक्षी नेताओं ने सरकार से प्रदर्शनकारियों की मांगों पर ध्यान देने और उनकी समस्याओं का समाधान करने की मांग की।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे पिछले कई सालों से परीक्षा और नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी मांगों पर कोई ध्यान नहीं दे रही है। उनका आरोप है कि सरकार जानबूझकर नियुक्ति प्रक्रिया में देरी कर रही है, जिससे उनके भविष्य पर बुरा असर पड़ रहा है।
यह घटना बिहार में शिक्षा और बेरोजगारी के मुद्दों को उजागर करती है। यह सवाल उठाती है कि क्या सरकार युवाओं की मांगों को पूरा करने के लिए पर्याप्त प्रयास कर रही है या नहीं।
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