
हजारीबाग के बाबू गांव, कोर्रा निवासी आलेख गौरव की सोमवार की सुबह झील में डूबने की दुर्भाग्यपूर्ण घटना सामने आई। जैसे ही यह समाचार उनके परिजनों और स्थानीय लोगों को मिला, सभी घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े। सभी ने अपने स्तर पर खोजबीन का प्रयास किया, लेकिन शव बरामद नहीं हो सका।

घटना की सूचना मिलते ही पीड़ित परिजनों ने सदर विधायक प्रदीप प्रसाद को संपर्क किया। विधायक श्री प्रसाद ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत जिला प्रशासन से संपर्क स्थापित किया और एनडीआरएफ की टीम को बुलाने का आग्रह किया। श्री प्रसाद सोमवार की देर शाम स्वयं घटनास्थल पहुँचे और जिला प्रशासन व उच्च अधिकारियों से लगातार संवाद करते रहे। परंतु, बार-बार प्रयासों के बावजूद एनडीआरएफ की टीम घटनास्थल पर नहीं पहुंच सकी, जो अत्यंत पीड़ादायक और चिंता का विषय था। सरकारी तंत्र की निष्क्रियता को देखते हुए विधायक प्रदीप प्रसाद ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए चौपारण की एक प्रशिक्षित गोताखोर टीम को अपने निजी खर्च पर हजारीबाग बुलवाया। यह टीम रात्रि करीब 11:00 बजे तक झील में खोजबीन करती रही, परंतु शव नहीं मिल सका। अगले दिन मंगलवार को सुबह 6:00 बजे से पुनः खोजबीन का कार्य शुरू किया गया। लगभग आधे घंटे के अथक प्रयास के बाद, सुबह 6:30 बजे आलेख गौरव का शव बरामद कर लिया गया। इस पूरी घटना में सदर विधायक प्रदीप प्रसाद की सक्रियता और मानवीय संवेदनशीलता ने उन्हें पीड़ित परिवार के लिए एक मसीहा के रूप में प्रस्तुत किया। घटनास्थल पर उपस्थित पत्रकारों से बातचीत करते हुए विधायक श्री प्रसाद ने कहा की हजारीबाग जैसे महत्वपूर्ण जिले के लिए यह अत्यंत दुखद बात है कि जब एक युवक की जान गई और तत्काल राहत की आवश्यकता थी, तब एनडीआरएफ की टीम उपलब्ध नहीं हो सकी। सरकार की तरफ से केवल आश्वासन दिए जाते रहे, लेकिन जमीन पर कोई ठोस सहायता नहीं मिली। उन्होंने आगे कहा की चौपारण जैसे छोटे से गाँव से आई टीम ने, जिसमें एक 65 वर्षीय बुजुर्ग भी शामिल थे, अपनी मेहनत के बल पर शव को बरामद किया। ये लोग अपनी सूझबूझ और साहस से वह कर गए, जो सरकार के पास संसाधनों के बावजूद नहीं हो सका।

*विधायक ने घोषणा की*
मेरा प्रयास रहेगा कि इस टीम को बेहतर प्रशिक्षण दिलाया जाए और उन्हें गोताखोरी व राहत कार्यों के लिए आवश्यक सभी औज़ार निःशुल्क उपलब्ध कराए जाएं। इतना ही नहीं, ऐसे टीम के 1-2 सदस्यों को मासिक वेतन पर नियुक्त करने का प्रयास करूंगा, ताकि भविष्य में इस तरह की किसी भी दुर्घटना की स्थिति में तत्काल और प्रभावी सहायता प्रदान की जा सके।
*श्री प्रसाद ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा की* सरकार के भरोसे सिर्फ घोषणाएं मिलती हैं, ज़मीन पर कार्य खुद करना पड़ता है। अगर हमने चौपारण की टीम को नहीं बुलवाया होता, तो शायद शव मिलना और भी मुश्किल हो जाता। यह टीम मात्र 1 से डेढ़ घंटे के भीतर हजारीबाग पहुंच गई और रात्रि 11 बजे तक लगातार कार्य करती रही।
*मानवता और जनसेवा का उदाहरण बने विधायक प्रदीप प्रसाद*
यह घटना एक बार फिर यह सिद्ध करती है कि जब जनप्रतिनिधि संवेदनशीलता के साथ जनता के दुःख-सुख में भागीदारी निभाते हैं, तब जनता का विश्वास लोकतंत्र में और अधिक मजबूत होता है।प्रदीप प्रसाद ने अपने कर्मों से यह दिखाया कि वे केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि जनता के सच्चे सेवक हैं।
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