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पप्पू यादव कर रहे हैं अमित शाह की तारीफ? क्या बदलने वाली है बिहार की राजनीति की फिजा

ByBiru Gupta

Dec 10, 2024

 

 

पूर्णियाः बिहार के पूर्णिया संसदीय सीट से निर्वाचित निर्दलीय पप्पू यादव लगातार सुर्खियों में रहते हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी का सच्चा सिपाही बताने वाले पप्पू यादव ने इस बार बीजेपी के वरिष्ठ नेता अमित यादव की प्रशंसा कर सभी को चौंका दिया है। सांसद पप्पू यादव के इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में हलचल मच गई है। सवाल उठ रहा है कि क्या राजनीतिक समीकरण बदलने वाले हैं?

 

अमित शाह ने 11 वर्षों में भाजपा को ऊंचाइयों तक पहुंचाई

 

पप्पू यादव ने न सिर्फ अमित शाह की तारीफ की है बल्कि नितिन गडकरी और अटल बिहारी वाजपेयी का भी सम्मान किया है। उन्होंने कहा कि वो गडकरी की काफी तारीफ करते, अटल जी का काफी सम्मान करते हैं, हर कीमत पर सम्मान करता हूं। पप्पू यादव ने कहा- ‘मैं एक बार साफ कह देना चाहता हूं कि 11 वर्षों में भारतीय जनता पार्टी ने इतनी प्रगति की, उसमें अमित शाह की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है। यदि अमित शाह नहीं होते तो शायद बीजेपी यहां नहीं होती। अमित शाह की रणनीति ने ही बीजेपी को इतनी ऊंचाइयों तक पहुंचाने का काम किया।’

 

अमित शाह की तरह हर पार्टी में चाणक्य रहना चाहिए

 

पप्पू यादव ने कहा-‘अमित शाह चाहे गलत हो या सही, लेकिन जिस तरह से उनका घर पर यानी अपनी पार्टी पर कंट्रोल है, वह अद्भुत है, यही कारण है कि उन्हें सभी चाणक्य मानते हैं। हर पार्टी में अमित शाह की तरह एक चाणक्य रहना चाहिए। जिस तरह से जुनून के साथ काम करते हैं, वो गजब का है।’

 

चुनावी रणनीति बनाने में अमित शाह की भूमिका अहम

 

निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने कहा- ‘ये अलग बात है कि अमित शाह को ‘नफरत का किंग’ माना जाता है, लेकिन वो अपनी पार्टी के लिए चाणक्य है। नरेंद्र मोदी को बनाने में अमित शाह की बड़ी भूमिका रही है। नरेंद्र मोदी को चुनाव प्रबंधन के बारे में बहुत कुछ जानकारी नहीं होती, इस मामले में पूरा अधिपत्य अमित शाह का ही है। बीजेपी की चुनावी रणनीति बनाने में अमित शाह की बड़ी भूमिका होती है।’

 

एक तरफ जहां पप्पू यादव अमित शाह की प्रशंसा कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बीजेपी पर भी हमला बोल रहे हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि आगे बिहार की राजनीति किस ओर मोड़ लेती है। क्या यह प्रशंसा किसी नए गठबंधन का संकेत है या सिर्फ एक रणनीतिक चाल? क्या पप्पू यादव कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल होंगे? या फिर यह सिर्फ चर्चा बटोरने का एक तरीका है? फिलहाल, पप्पू यादव के इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है।


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