
केरेडारी : केरेडारी प्रखंड में भारत सरकार के महारत्न कम्पनी एनटीपीसी (एन एम एल) द्वारा सी एस आर मद से होने वाली बिकास कार्य को विस्थापित प्रभावित क्षेत्र के भू रैयतों कई लफ्जों से नवाजा है! कई लोगों का कहना है कि एनटीपीसी क्षेत्र में बिकास कार्य दिया तले अंधेरा के तर्ज पर कर रही है तो कई भू रैयतों का आरोप है कि सीएसआर मद से होने वाले विकास कार्य लॉली पॉप की तरह है! वहीं भू रैयतों के एक बड़े वर्ग का आरोप है कि भारत सरकार के महारत्न कंपनी का चोला धारण करने वाली एनटीपीसी का रवैया रंगे सियार की तरह है! केरेडारी प्रखंड क्षेत्र में एनटीपीसी के दो दो माइंस केरेडारी व चट्टीबरियातु कोयला खनन परियोजना से अब प्रति वर्ष अरबो रुपये की आमदनी शुरू हो गयी है।
इसके विपरीत अगर केरेडारी प्रखंड क्षेत्र के सड़कों की हालत देखी जाय तो ऐसा लगता है यहां एनटीपीसी द्वारा सीएसआर मद से सामुदायिक विकास के कार्य मे सिर्फ कोरम पूरा किया जा रहा है! सबसे पहले हम गरी कलां स्थित कंडाबेर बेलतू मोड से माता स्थान रोड़ (चार किलोमीटर) की बात करेंगे! जहां नेता से लेकर एनटीपीसी के अधिकारी भी माँ अष्टभुजी मंदिर में आस्था रखते हैं। लगभग हर माह हजारो श्रद्धालुयों का आना- जाना इस मार्ग से मंदिर तक होता है हिचकोले खाना पसंद आ रहा है पर इस सड़क को दुरुस्त कराना उचित नही समझा है। हम दूसरी सड़क कोदवे से पाण्डु व बालेदेवरी( 8 किलोमीटर) का बात करेंगे तो यह सड़क भी इतनी खस्ता है कि राहगीरों को काफी मशकत के बाद लोचर, बसरिया,हैवई, बेंगवरी, पाण्डु, तरहेसा, टुंडा,बलिया, बालेदेवरी गांव जाना होता है, सबसे बड़ी बात है कि इसी मार्ग से केरेडारी कोयला खनन परियोजना में कार्यरत अधिकारी व वर्कर्स का जाना होता है। इस सड़क का खराब होने के पीछे कन्वेयर बेल्ट निर्माण कर रही कम्पनी एल एंड टी के भारी वाहन(50 से 100 टन भारी) हैं। रोज टेलर से भारी मशीन इसी 12 फिट चौड़ी सड़क से ले जाया जाता है। जबकि इस सड़क की लोड लेने की क्षमता मात्र 10 से 12 टन भारी वाहन तक हिं सीमित है। प्रखंड के तीसरी जर्जर सड़क की बात करें तो केरेडारी बेलचौक से पगार नोवा आहार तक की जर्जर सड़क है इस दो किलोमीटर सड़क की हालत इतनी जर्जर है कि कोई नया चालक एक बार गया तो दुबारा नही जाना चाहेगा जबकि इसी मार्ग से चट्टीबरियातु कोयला खनन परियोजना में कार्यरत अधिकारी व वर्कर्स भी इसी मार्ग से जाते हैं एनटीपीसी के प्रबंधक भी इसी मार्ग से जातें हैं पर इस सड़क को दुरुस्त करना मुनासिब नही समझा गया। और आगे चौथी सड़क की बात करेंगे तो जोरदाग से लबनिया मोड़ की ढाई किलोमीटर की जर्जर सड़क है। इस मार्ग से ट्रांसपोर्टिंग भी होता है यही कारण है कि सड़क काफी जर्जर हो गयी है तथा लगातार जाम लगा रहता है जिससे जोरदाग गांव के लोगों को केरेडारी व टंडवा जाने में बड़ी परेशानी होती है। इस सड़क का भार कम करने के लिये जोरदाग मुंडा टोली से लबनिया मोड़ तक 2.2 किलोमीटर बाईपास ट्रांसपोर्टिंग सड़क बनाई गई पर सभी रैयत जिनकी जमीन इस 2.2 किलोमीटर सड़क में गयी है कम्पनी इनके साथ ठीक से समझौता नही कर पाई नतीजा लगातार इस सड़क पर रैयतों का टेंट लगा रहता है। रैयत नॉकरी व मुआवजा की मांग करते हैं!
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