
लखीसराय – गुरुवार 20 फरवरी को नशाखुरानी के हुए शिकार व्यक्ति को आर पी एफ मननपुर के कर्मचारी मनोज कुमार ने हेल्थ सेंटर रामपुर पहुंचाने का काम किया। मिली जानकारी में रेलवे स्टेशन के कैंपस में सुबह किसी ट्रेन से उतरने के उपरात कई घंटे तक बदहवास पड़ा व्यक्ति किसी भी प्रकार की जानकारी देने से असमर्थ था,वही व्यक्ति के पास किसी भी प्रकार की कोई पहचान पत्र नहीं मिल पाया जिससे सामाचार लिखे जाने तक कोई जानकारी नहीं मिल पाया। दूसरी तरफ अस्पताल पहुंचे पर अस्पताल पहुंचाने के लिए एम्बुलेंस के लिए बात की गई तो व्यक्ति की जान बचाने की बात न कर नियम और निर्देश अस्पताल के कर्मचारी बताने लगे। कर्मचारी ने कहा कि आपको पहले 102 पर बात करना था फिर एम्बुलेंस जा पाता। दूसरी ओर बदहवास मरीज को टोटो से आर पी एफ कर्मचारी के द्वारा पहुंचाने पर कोई भी मरीज को उतारने से लेकर बेड तक पहुंचाने की मदद नहीं की। इससे साफ पता चलता है कि नियम निर्देश इन अस्पताल के कर्मचारी से पहले समझना होगा फिर किसी को अस्पताल में भर्ती करवाना होगा। वही इसी अस्पताल के नियमों की बात करे तो डॉक्टर उपस्थित रहते है पर कर्मचारी कभी गायब तो कभी लेट लतीफे होते है उस समय सरकार के द्वारा दिए गए नियम और निर्देशों को ये ताक पर रखकर मनमाने तरीके से ड्यूटी करते नजर आते है वही अगर नियत समय पर इस अस्पताल की जांच की जाए तो कौन कितने नियम पर रहते है पता चल जाएगा और दूध का दूध और पानी का पानी नजर आएगा।
अस्पताल के नियम जिसे बड़े पैमाने पर फॉलो किया जाता है –

(1) कोई भी मरीज जिनकी स्थिति खराब हो और कोई मददगार ना हों को ले जाने के बाद स्ट्रेचर नहीं मिल पाता है उसे किसी तरह बेड तक पहुंचाना होता है।

(2) अस्पताल में कर्मचारी के जगह कोई और फाइलों से छेड़छाड़ या मेंटेनेंस करने में लगा रहता है जो सबको पसंद है और कर्मचारी भी उनसे मिले रहते हैं।
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