
बिहार राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड के शताब्दी समारोह में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के एक फैसले ने सभी का ध्यान खींचा। इस कार्यक्रम में अल्पसंख्यक मंत्री जमा खान ने सीएम नीतीश को एक टोपी पहनाने की कोशिश की, लेकिन नीतीश कुमार ने खुद टोपी पहनने से इनकार कर दिया। उन्होंने उस टोपी को खुद पहनने के बजाय मंत्री जमा खान को ही पहना दिया। यह घटना उस समय हुई जब मंच पर मुख्यमंत्री को सम्मानित किया जा रहा था।

इस घटना ने 12 साल पुरानी एक और घटना की याद दिला दी, जब नीतीश कुमार ने तत्कालीन गुजरात के मुख्यमंत्री और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कटाक्ष किया था। 2013 में, जब नरेंद्र मोदी ने गुजरात में मुस्लिम टोपी पहनने से इनकार कर दिया था, तब नीतीश कुमार ने इस पर तंज कसते हुए कहा था कि उन्हें सार्वजनिक जीवन में सभी धर्मों का सम्मान करना चाहिए। उस समय, नीतीश कुमार ने मुस्लिम समुदाय के लोगों को टोपी पहनकर अभिवादन किया था।

राजनीतिक विश्लेषक इस घटना को कई तरह से देख रहे हैं। कुछ लोगों का मानना है कि यह नीतीश कुमार का एक रणनीतिक कदम हो सकता है, जो दर्शाता है कि वह धर्म से जुड़ी किसी भी पहचान को सार्वजनिक रूप से नहीं अपनाना चाहते हैं। वहीं, कुछ अन्य लोगों का कहना है कि यह उनका व्यक्तिगत फैसला था। इस घटना पर अभी तक मुख्यमंत्री या उनके कार्यालय की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है। बहरहाल, इस घटना ने एक बार फिर से राजनीति में प्रतीकों और पहचान की भूमिका पर बहस छेड़ दी है।
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