
सरायकेला: दक्षिण पूर्वी रेलवे के आद्रा और मुरी डिवीजन के अंतर्गत नीमडीह थाना क्षेत्र में स्थित पितकी रेलवे फाटक यात्रियों और मालवाहकों के लिए एक दुःस्वप्न बन गया है। रेलवे ट्रैक पर ट्रेनों के भारी दबाव और निर्माणाधीन फ्लाईओवर के चलते यहाँ लगने वाला जाम अब जानलेवा साबित हो रहा है।

15 घंटे का इंतजार और भूखे प्यासे चालक

जमशेदपुर, रांची, पुरुलिया, धनबाद और बोकारो सहित बिहार, ओडिशा और छत्तीसगढ़ को जोड़ने वाले इस मुख्य मार्ग पर वाहन चालकों को घंटों नहीं, बल्कि 10 से 15 घंटे तक जाम में फंसना पड़ रहा है। पिछले एक सप्ताह से हालात इतने बदतर हो गए हैं कि रघुनाथपुर और चांडिल अनुमंडल तक वाहनों की 5-5 किलोमीटर लंबी कतारें लग रही हैं। चालक पानी और भोजन के बिना भूखे-प्यासे रहने को मजबूर हैं।
NHAI की लापरवाही और अधूरा फ्लाईओवर
स्थानीय लोगों और चालकों ने NHAI पर लापरवाही का गंभीर आरोप लगाया है। एनएचएआई टोल टैक्स तो वसूल रहा है, लेकिन फाटक के बगल में बनने वाला रेलवे फ्लाईओवर ब्रिज अभी तक अधूरा है। इस वजह से मालवाहक ट्रकों और बसों की लंबी कतारें मीलों लंबी खिंच गई हैं।
एम्बुलेंस में दम तोड़ रहे मरीज
जाम की सबसे भयावह स्थिति तब होती है जब एम्बुलेंस भी इसमें फंस जाती है। पुरुलिया से आने वाले मरीजों की हालत जाम में फंसे रहने के कारण और अधिक बिगड़ जाती है, जिससे जान का खतरा बढ़ जाता है।
चालकों की आपबीती
विजय यादव (चालक): “ओडिशा से पश्चिम बंगाल मिट्टी ले जाने के दौरान रात 10 बजे से जाम में फंसा हूँ। NH-33 टाटा-रांची मुख्य मार्ग से लेकर बाईपास तक 5 किलोमीटर की दूरी तय करने में 15 घंटे लग गए। केंद्र और राज्य सरकार को जल्द फ्लाईओवर का काम पूरा करना चाहिए।”
सुजीत कुमार (चालक): “रात 10 बजे से भूखा हूँ, पानी के लिए तरस रहा हूँ। NHAI की लापरवाही देखिए, कहीं भी पेयजल की सुविधा नहीं है।”
प्रशासन से गुहार
स्थानीय लोगों और चालकों ने प्रशासन से मांग की है कि जाम को नियंत्रित करने के लिए ट्रैफिक पुलिस तैनात की जाए और जल्द से जल्द फ्लाईओवर का निर्माण कार्य पूरा कर पुल को चालू किया जाए।
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