
बलियापुर, उमेश चौबे: कृषि विज्ञान केंद्र, धनबाद द्वारा चलाए जा रहे ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ से जिले के किसानों की समृद्धि बढ़ने की उम्मीद है। इस अभियान के तहत निरसा प्रखंड के छह गांवों – सना, पालारपुर, कुलकुरी, भालकुरिया, उदयपुर और प्रतापडीह – में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए, जहाँ 62 किसानों से कृषि सुधार संबंधी महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया (फीडबैक) ली गई।

कृषि विज्ञान केंद्र, धनबाद के वरिष्ठ वैज्ञानिक व हेड डॉ. राजीव कुमार ने किसानों को जल संरक्षण, टपक सिंचाई (ड्रिप इरीगेशन) और सामूहिक प्रथम पंक्ति प्रत्यक्षण (फ्रंटलाइन डेमोंस्ट्रेशन) के तहत तिल, मूंगफली और सोयाबीन की खेती की विस्तृत जानकारी दी। इस कार्यक्रम में बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, रांची के कृषि वैज्ञानिक डॉ. भूपेंद्र कुमार और डॉ. बिरेंद्र कुमार, आईसीएआर रांची से कृषि वैज्ञानिक डॉ. सूर्य कांत मानीक, पशुपालन वैज्ञानिक डॉ. कनका, रमन कुमार श्रीवास्तव और श्यामल सरकार जैसे विशेषज्ञ भी उपस्थित रहे।

अभियान को गति देने के लिए दो टीमों का गठन किया गया है, जिसमें प्रत्येक टीम में चार वैज्ञानिक शामिल हैं। ये टीमें एक दिन में तीन गांवों में कार्यक्रम आयोजित कर रही हैं। सोमवार तक, कुल 72 गांवों में सफलतापूर्वक कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं।
प्रशिक्षण सत्रों के दौरान, डॉ. बिरेंद्र कुमार ने बिरसा धान और वंदना जैसी धान की उन्नत किस्मों के बारे में जानकारी दी। कृषि वैज्ञानिक देवकांत प्रसाद ने मिट्टी परीक्षण के महत्व और विधियों पर प्रकाश डाला। डॉ. सीमा सिंह ने किसानों को मशरूम उत्पादन और कुपोषण दूर करने में सहजन की खेती के बेहतर विकल्प बताए। डॉ. भूपेंद्र कुमार ने प्राकृतिक खेती और मोटे अनाज की खेती के लाभों पर चर्चा की, जबकि डॉ. सूर्य कांत मानीक ने धान और अन्य खरीफ फसलों में कीट नियंत्रण के प्रभावी तरीकों की जानकारी दी। पशुपालन वैज्ञानिक डॉ. कनका ने किसानों को पशुपालन संबंधी महत्वपूर्ण सलाह दी। आत्मा के सहायक तकनीकी प्रबंधक डॉ. जावेद इस्लाम ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना और कृषि विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के बारे में किसानों को अवगत कराया।
इस अवसर पर प्रगतिशील किसान वरुण कुमार चौधरी, बबीता गोरांय सहित सैकड़ों किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जो इस अभियान की सफलता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह अभियान निश्चित रूप से धनबाद के किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़कर उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगा।
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