
सरायकेला: सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल अनुमंडल क्षेत्र में हाथियों का उत्पात थमने का नाम नहीं ले रहा है। बीते रात, चांडिल वन क्षेत्र के अधीन लावा गांव में एक हाथी ने जमकर तांडव मचाया। इस विशाल हाथी ने छह घरों को तोड़ दिया और घरों में रखा सारा अनाज चट कर गया। इस घटना से ग्रामीणों में वन विभाग के प्रति गहरा आक्रोश है।

झुंड से बिछड़े हाथी ने मचाया उत्पात

चांडिल अनुमंडल क्षेत्र में हाथियों का झुंड पूरे बारह महीने डेरा डाले रहता है। शाम ढलते ही ये हाथी जंगल से निकलकर गांवों में प्रवेश कर जाते हैं और उपद्रव मचाना शुरू कर देते हैं। 11 जुलाई की रात भी, झुंड से बिछड़े एक विशाल हाथी ने लावा गांव में तबाही मचाई। ग्रामीणों का मानना है कि यह वही हाथी है जो कुछ दिन पहले कादला वन में देखे गए झुंड से अलग होकर गांव में घूम रहा है।
हाथी के हमले से प्रभावित परिवारों में पंकज महतो, दोलू महतो, सीताराम आचार्य, अशोक गोराई, बीरा गोराई और हरेलाल गोराई शामिल हैं।
वन विभाग पर ग्रामीणों का आरोप
चांडिल वन क्षेत्र के अधीन दर्जनों गांवों को अब रेड जोन माना जाने लगा है, क्योंकि ये गांव लगातार हाथियों के हमलों का शिकार हो रहे हैं। ग्रामीणों ने वन विभाग पर भारी नाराजगी व्यक्त की है और आरोप लगाया है कि चांडिल वन विभाग हाथियों को नियंत्रित करने में पूरी तरह विफल रहा है।
तत्काल कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने वन विभाग से तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की है। उनकी प्रमुख मांगें हैं:
वन विभाग हाथियों को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी उपाय करे।
ग्रामीणों को हाथियों से बचाव के लिए आवश्यक सुरक्षा उपाय बताए जाएं और उनमें जागरूकता लाई जाए।
हाथी के हमले से प्रभावित परिवारों को तत्काल मुआवजा राशि और सहायता प्रदान की जाए।
हाथियों के लगातार हमलों से ग्रामीणों की जान-माल की सुरक्षा को गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। वन विभाग को इस गंभीर समस्या का समाधान निकालने के लिए बिना किसी देरी के तत्काल कदम उठाने चाहिए ताकि ग्रामीण भयमुक्त होकर रह सकें।
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