
सरायकेला के चांडिल वन क्षेत्र में आने वाले नीमडीह थाना क्षेत्र के पुड़ियारा और बांदू जंगल से हाथियों का एक झुंड आज शाम कांदला जंगल की ओर चला गया। बताया जा रहा है कि यह झुंड सुबह से बांदू जंगल के आसपास डेरा डाले हुए था। भोजन की तलाश में जंगली हाथियों के झुंड अक्सर चांडिल की दलमा सेंचुरी गज परियोजना से भटककर शहरी क्षेत्रों और गांवों में घुस आते हैं, जिससे काफी उत्पात मचता है। ये हाथी पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले के अयोध्या पहाड़ और धनुडीह होते हुए सरायकेला जिले के नीमडीह थाना क्षेत्र में प्रवेश करते हैं।

शाम ढलते ही ये जंगली हाथी घरों में रखे अनाज और अन्य सामग्री को अपना निवाला बनाते हैं, जिससे ग्रामीणों के लिए शाम को घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है।

मादा हथिनी की मौत के बाद शावक की तलाश और बढ़ता डर
हेवेन पंचायत के पहाड़ गांव में एक मादा हथिनी की मौत के बाद, उसके 6 से 9 महीने के शावक के मां की तलाश में सीमा और गुंडा गांव में घरों में घुसने की सूचना मिली है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने बुधवार सुबह मृत मादा हथिनी के शरीर से लिपटकर विलाप करते हुए इस शावक को देखा था। ग्रामीणों के अनुसार, इस शावक के साथ 15 साल का एक बड़ा हाथी भी घूमता देखा गया है। मां को खोने का गम इस शावक के लिए भुला पाना मुश्किल हो रहा है।
हालांकि, चांडिल वन विभाग ने अब तक इस बेबी हाथी की खोज करने में कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई है, जिससे ग्रामीणों में इन दो हाथियों को लेकर डर बना हुआ है। ये हाथी मनुष्यों को देखते ही उनकी ओर आकर्षित होकर दौड़ाने लगते हैं, जिससे कभी भी मानव जीवन के लिए खतरा पैदा हो सकता है। दिहाड़ी मजदूर जो हर सुबह काम पर निकलते हैं और शाम को थके-हारे घर लौटते हैं, उन्हें यह नहीं पता कि कब मौत उनके आंगन में खड़ी हो सकती है और उन्हें भागने का भी समय नहीं मिलेगा। विभाग द्वारा हाथियों के संबंध में आम आदमी को अभी तक पर्याप्त जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा रही है।
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