
सरायकेला : तानिशिया के ग्रामीणों ने मांगा पहले सड़क बिजली ,शिक्षा ,स्वास्थ्य ओर शुद्ध पानी की व्यवस्था मुहैया करे , देश की आज़ादी ओर राज्य अलग बनने के बाद अबतक इस गांव में विकास की रोशनी नहीं पहुंचे।लोग रोजगार के पलायन कर रहे हैं.

इन गांव के खुटखट्टी एवं तनिसीया के ग्रामीणों को प्रशासनिक अधिकारियों के द्वारा विकास और रोजगार के नाम पर पानी ,सड़क और बिजली के बदले मोबाइल टॉवर से गुमराह किया जा रहा है :

चांडिल : सरायकेला खरसावां जिला के चांडिल अनुमंडल स्थित ख़ुटखट्टी ओर तनीशिया बहुल मुंडा गांव नाम से जाता हे।
चौका थाना से महज 30 किलोमीटर दूरी यह गांव आदिवासी गांव है और देश आजादी के बाद राज्य बने अब तक गांव में शिक्षा ,सड़क ,बिजली, शुद्ध पानी ,स्वास्थ्य केंद्र आदि मूलभूत सुविधा से वांक्षित है
देश की आज़ादी ओर झारखंड राज्य अलग होने 22वा हो गया फिर भी यह गांव आदिवासी मुंडा समझे लोग शिक्षा,स्वास्थ्य,बिजली ओर सड़क जैसे मूलभूत सुविधा कोषों दूर.जिसके कारण इन मुंडा आदिवासी समाज के लोग के बीच सरकारी योजना से काटा गया
चांडिल प्रखंड विकाश पदाधिकारी एवं अंचल अधिकारी ओर चौका पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों के द्वारा विकाश ओर रोजगार के नाम पर सड़क ,पानी, शिक्षा ओर बिजली के बदले दूरसंचार यानी मोबाइल टॉवर से गुमराह किया जा रहा हे ।कहते यह लग जाने से धीरे धीरे विकाश पहुंचेंगे..?
चांडिल प्रखंड विकास पदाधिकारी अंचल पदाधिकारी चौका पुलिस बल 2 मई को तनीषिया गांव के ग्रामीणों के पास पहुंचे और टॉवर लगाने के लिए प्रशासन दबाव डाला गया।
गांव के ग्रामीणों की बीच पहुंचे एवं ग्रामीण को यह समझाने लगे आपके गांव में टॉवर लगाने से दूरसंचार की सुविधा होगी ।
जिसके विरोध में सर्वसहमति से ग्रामीणों ने मांग किया है, हमारे गांव में दूरसंचार की जरूरत नहीं है हमें मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराई जाए । जिसे हमे अनुमंडल जिला मुख्यालय जाने के लिए पैदल पहाड़ी रस्ते से गुजरना न पड़ें। बुद्धिजीवी लोगो ने कहा पूर्व में सड़क बिजली स्वास्थ्य केंद्र शिक्षा ओर आदि समस्या के लिए लिखित ज्ञापन सोफा गया था ।जिसका छाया कॉपी दिखाने पर प्रशासनिक अधिकारी देखने से आनाकानी करने लगा । किया रहा मंशा प्रशासनिक का भोले भाले ग्रामीण को प्रखंड एवं अंचल पदाधिकारी द्वारा पुलिस द्वारा यह समझाने लगे कि आपके गांव में दूरसंचार निगम के टॉवर लग जाने से धीरे-धीरे आपके क्षेत्र में विकास होगी आपको यह भी बता दूं बारिश के समय ग्रामीणों को कठिनाई की सामना पहाड़ी रस्ते से गुजरना पड़ता । एवं गर्भवती महिला प्रसव पीड़ा के दौरान कोई बार एम्बुलेंस गाड़ी गांव नहीं पहुंचते है। सांप बिच्छु आदि ज़हरलिया चीजों से काटने से इलाज हेतु चांडिल स्वास्थ्य केंद्र पहुंचना पहले दम तोड़ देता ।किसी बूढ़े बुजुर्गों को तबीयत बिगड़ जाने पर खटिया (डोला) के माध्यम से 20 किलोमीटर दूरी टाटा रांची मुख्य राज्यमार्ग पहुंचाने के बाद गाड़ी की। सुविधा उपलब्ध होता है। ऐसे में उस मुंडा आदिवासी गांव की ग्रामीण को सड़क स्वास्थ्य, बिजली,की जरूरत है, पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण लोगों को आवाजाही में कठिनाई की सामना करना पड़ रहा है ।
वीरेंद्र मुंडा (तनीषिया गांव) ने बताया कि हमारे गांव आज भी देश आजादी के बाद राज्य अलग हुआ ओर हमारे गांव में विकास के रोशनी नहीं पहुंचा ।हमारे आदिवासी राज्य में आदिवासी मुख्य मंत्री हेमंत सोरेन जैसे जुझारू नेता रहने के प्रश्चात मेरे गांव में मूलभूत सुविधाओं से खरा नहीं उतरा इसका पुष्टि ओर जिम्मेवार कौन होगा। आज भी लोगो के घरों में डिबरी जलाए जाते ।यह हे अलग झारखंडी राज्य ,जहा आदिवासी समुदाय के लोगों शोषित पीड़ित रहते हे। किया विकास के रोशनी नहीं पहुंचा इससे अंदाजा लगा सकते हैं गांव कितने पिछड़े हैं ।
हेसाकोचा पंचायत में एक दर्शक था ,नक्सल की गढ़ माना जाता था ,चुनाव भी कोई बार बहिष्कार भी हुआ,
यह हैंसाकोचा पंचायत एक दर्शक था घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्र मना जाता था । जिससे कुछ वर्ष पूर्व उसे गांव में लोकसभा चुनाव ओर विधानसभा चुनाव कराने के लिए प्रशासन को सोचना पड़ता । उस समय बड़े-बड़े हार्डकोर नक्सली का गढ़ माना जाता था।अनुमंडल से जिला प्रशासन ओर राज्य सरकार ओर महा महिम से अनुरोध करता हु ।किया हमारे गांव ओर मुंडा परिवार के लोगे को भारत की संविधान से हटाने चाहते हे ।बर्ष वित जाने के बाद मेरा गांव सरकारी सुविधा से वांक्षित क्यों रखा गया ।? अनुरोध हे कि मूलभूत सुविधा को पहले सुचारू ढंग से पहल किया जाए , दूर संचार निगम का टावर लगाने से गांव का विकास नहीं होगा, हमे शिक्षा सड़क बिजली स्वास्थ्य एवं शुद्ध पेयजल की जरूरत हे ।आज मुंडा परिवार के लोगों झरना की पानी पीने पर मजबूर हे। स्वरोजगार के लिए जंगल पर निर्भर है। कोई परिवार के बच्चे दूसरे राज्य में पलायन किया दो जून रोटी के लिए ।पहले सरकार इन सुविधा को पहल करे जिसे लोगो को पलायन पर रोक लगे ।जिससे ग्रामीण का मनवल न टूटे ओर सरकार से संभावना बना रहै।
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