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कुल्टी- विश्व हिंदू परिषद के पूर्व जिला उपाध्यक्ष श्री राम सिंह ने निर्दल उम्मीदवार के रूप में कुल्टी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की घोषणा ।

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Apr 5, 2026
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रिपोर्ट सत्येन्द्र यादव

कुल्टी विधान सभा सीट से विश्व हिंदू परिषद के पूर्व जिला उपाध्यक्ष सह नव नियुक्त भाजपा कर्मी श्री सिंह ने निर्दल उम्मीदवार के रूप में इस सीट से चुनाव लड़ने की घोषणा से राजनीतिक गलियारों में गहमा गहमी का माहौल उत्पन्न कर दिया है ।

इस संबंध में प्राप्त जानकारी के अनुसार श्री राम सिंह इस क्षेत्र के हिन्दू संगठन के नामचीन चेहरा है । बराकर बेगुनिया बाजार के रहने वाले विश्व हिंदू परिषद के पूर्व जिला उपाध्यक्ष पद पर रहने के अलावा उन्होंने हाल ही में अपने समर्थकों के साथ भाजपा की सदस्यता भी ग्रहण किया था । लेकिन अचानक उन्होंने शनिवार को कुल्टी विधानसभा सीट से निर्दल उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने की घोषणा कर डाली । इतना ही नहीं उन्होंने नामांकन के लिए बराकर स्टेशन से एक हजार मोटरसाइकल रैली में अपने समर्थकों को शामिल होने का आह्वान भी किया । जो क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है । लोगो में यह चर्चा हो रही है कि श्री राम सिंह के चुनाव लड़ने से सीधे तौर पर भाजपा को ही नुकसान पहुंचेगा ।

वही यह भी चर्चा जोरो पर है कि यदि निर्दल होकर चुनाव हो लड़ना था तो अभी कुछ ही दिनों पूर्व भाजपा की सदस्यता क्यों ग्रहण किया । जो मंथन करने योग्य है भाजपा में रहकर भाजपा के विरुद्ध अपने आप को उम्मीदवार घोषित करना काफी असहज है । वही वयोवृद्ध राजनीतिक जानकारों का कहना है कि श्री राम सिंह का यह फैसला भाजपा के साथ साथ कही ना कही विश्व हिंदू परिषद को भी नुकसान पहुंचाने वाला फैसला है ।

उन्होंने बताया कि बराकर में राम नवमी की सफल शोभायात्रा तथा प्रत्येक वर्ष उसमे बेतहाशा वृद्धि ने श्री राम सिंह के अंदर एक भ्रामक घमंड को अंकुरित कर दिया है । वे समझते है कि जितने लोग शोभायात्रा में शामिल होते है वे उन्हें देख कर शामिल होते है । वे उन्हें वोट देंगे या उनके कहने पर किसी को अपना वोट देंगे । लेकिन सच्चाई यह नहीं है शोभायात्रा में शामिल होने वाले लोग सच्चे हृदय से भगवान मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम का जन्म उत्सव मनाने के लिए शामिल होते है । उनका किसी भी राजनीतिक दल से कोई लेना देना नहीं रहता है ।

वही यह घोषणा से यह भी चर्चा है कि कही किसी अंदरूनी कलह या फिर राजनीतिक दबाव अथवा अन्य किसी दल से भीतरी सांठ गांठ के कारण तो यह फैसला नहीं लिया गया ।

जिससे सनातनी एक जुटता को खंडित करके उनके वोट को बांट कर तीसरी पार्टी के जीत का मार्ग खोला जा सके । हालांकि श्री राम सिंह के इस घोषणा के बाद हिन्दू संगठनों विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारियों ने भी असहमति जताया है । अब देखना यह है कि क्या श्री राम सिंह सोमवार को निर्दल उम्मीदवार के रूप में कितने समर्थकों के साथ नामांकन करते या फिर नहीं करते है । या लोग उन्हें चुनाव में अपना कितना मत देते है ।


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