
लखीसराय – एक तरफ सरकार के द्वारा दलित बस्तियों में तमाम प्रकार के सरकार की योजनाओं का लाभ देने की बात हो रही है

और इसको लेकर कैंप लगाया जा रहा है तो वही सरकारी विद्यालयों में दलित समुदाय के बच्चे को शिक्षा किस प्रकार से मिल रहा है इसे विद्यालय में जाकर देखा जा सकता है।

लखीसराय जिले के चानन प्रखंड के NPS नीमतर बिछवे मुसहरी स्कूल के बच्चों को उनके मिलने वाले शिक्षा में कटौती की जा रही है साथ ही यहां बच्चों की संख्या कुछ, उपस्थिति कुछ और मध्याह्न भोजन के वक्त कुछ दिखा कर उसका भी गवन किया जा रहा है। सरकारी शिक्षिका ममता कुमारी ने बयान में कहा कि हमारे विद्यालय में कुल छात्र छात्राओं की संख्या 88 है जिनमें आज 2 मई को उपस्थिति 65 बनाई गई है लेकिन वर्तमान में जो उपस्थित हैं वह मात्र 23 पाया गया। वही इस विद्यालय में शिक्षिका में रेखा कुमारी, पूनम कुमारी, ममता कुमारी शामिल है।
यहां 1 से पांचवी तक के बच्चे की पढ़ाई होती हैं लेकिन बच्चे दिसंबर की सही से किन किन शब्दों का उपयोग कर लिखा जाता है वह नहीं बता पा रहे थे। वही शिक्षिका को मीनू के हिसाब से बच्चों को क्या खिलाना है यह इन्हें पता नहीं था। इन्होंने कहा कि कुछ बच्चे भट्ठा पर रहते है और कुछ बच्चे नहीं आते है। मध्याह्न भोजन के वक्त 40 बच्चे उपस्थित थे जिनकी उपस्थिति बनाई गई पर मात्र 23 बच्चे ही उपस्थित पाए गए। अब अगर सरकारी विद्यालय में पढ़ने वाले दलित बच्चों के हक की बात की जाए तो यहां शिक्षक और प्रभारी अपने निजी कामों से विद्यालय से ही गायब रहते हैं तो फिर ऐसे में दलित बच्चे को किस प्रकार की शिक्षा मिल पाएगी कहना बड़ा मुश्किल है जबकि सरकार कहती है कि दलित बस्ती में योजनाओं का लाभ मिले लेकिन सबसे बड़ा लाभ शिक्षा से ही इन्हें वंचित रखा जा रहा है। शिक्षा विभाग के प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी एजाज आलम से बात करने पर बताया गया कि जांच कर कार्यवाही की जाएगी पर अब सवाल है कि भोजन के लिए मीनू के हिसाब से मिलने वाली राशि जिसकी कटौती की जा रही है किसके पॉकेट में जाएगी इसका जवाब अधिकारी ही दे पाएंगे।
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