
इंसान की शक्ति उसकी आत्मा में होती है, और आत्मा कभी विकलांग नही होती है ।शारीरिक दिव्यांगता को मात देकर हौसले और हुनर की मिसाल पेश कर रहे हैं। दारू प्रखंड के बक्शीड़ीह रहने वाले मनोहर उर्फ साहेब। जन्म से ही पोलियो के कारण दोनों पैरों से लाचार होने के बावजूद मनोहर ने अपनी कमजोरी को कभी अपनी राह का रोड़ा नहीं बनने दिया। उन्होंने अपने दृढ़ संकल्प और आत्मविश्वास के बल पर अपनी अलग पहचान बनाई है। और पूरे दारू प्रखंड और अन्य प्रखंड में मनोहर का नाम है । मनोहर ने अपने मामा, मूर्तिकार रामकुमार राम, से मूर्ति बनाने की कला सीखी। धीरे-धीरे उन्होंने मिट्टी की मूर्तियां बनाने में महारत हासिल कर ली। आज उनकी बनाई हुई मूर्तियां इतनी आकर्षक होती हैं कि लोग उन्हें देखकर अचंभित हो जाते हैं। और उनके पास मूर्तियां लेने के लिए दूर दराज से लोग आते हैं। क्योंकि उनके हाथ में ऐसी कला है कि उनकी मूर्तियां देखकर उत्साहित होते हैं। सरस्वती पूजा, लक्ष्मी पूजा और विश्वकर्मा पूजा जैसे पर्व पर उनकी बनाई मूर्तियों की खूब मांग रहती है। मनोहर अपनी मेहनत के बल पर न केवल अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं, बल्कि समाज के लिए प्रेरणा भी बन गए हैं। वे अपनी पत्नी और तीन बच्चों की जरूरतें पूरी करने के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं। मनोहर का जीवन इस बात का उदाहरण है कि शारीरिक अक्षम्यता भी किसी व्यक्ति को उसके लक्ष्य से नहीं रोक सकती, बशर्ते उसमें कुछ कर गुजरने का जज्बा हो। उनका संघर्ष और सफलता उन सभी के लिए प्रेरणा है जो मुश्किलों के आगे घुटने टेक देते हैं। मनोहर ने बतलाया कि हर व्यक्ति को अपने भीतर छिपी क्षमताओं की पहचान करनी चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति के पास हुनर होता है।

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