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झारखंड में डेंगू और चिकनगुनिया का बढ़ता खतरा, दो जिलों में जापानी बुखार की दस्तक

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Jul 16, 2025

 

झारखंड इस समय मानसून के मौसम से जूझ रहा है, और इसके साथ ही मच्छर जनित बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, राज्य के 16 जिलों में डेंगू और चिकनगुनिया के मामले सामने आए हैं, जो चिंता का विषय है। इसके अलावा, दो जिलों में जापानी बुखार (Japanese Encephalitis) के मामले भी दर्ज किए गए हैं, जिसने स्वास्थ्य अधिकारियों की चिंता को और बढ़ा दिया है।

डेंगू और चिकनगुनिया, दोनों ही एडीस मच्छर के काटने से फैलने वाली बीमारियाँ हैं, जो आमतौर पर दिन के समय सक्रिय होते हैं। इन बीमारियों के लक्षणों में तेज़ बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, त्वचा पर लाल चकत्ते और आँखों के पीछे दर्द शामिल हैं। गंभीर मामलों में, डेंगू हेमरेजिक बुखार (Dengue Hemorrhagic Fever) और डेंगू शॉक सिंड्रोम (Dengue Shock Syndrome) जैसी जटिलताएँ भी विकसित हो सकती हैं, जो जानलेवा साबित हो सकती हैं। चिकनगुनिया आमतौर पर जानलेवा नहीं होता, लेकिन इसके कारण होने वाला जोड़ों का दर्द लंबे समय तक बना रह सकता है, जिससे मरीजों को काफी परेशानी होती है।

जिन 16 जिलों में डेंगू और चिकनगुनिया के मामले सामने आए हैं, उनमें शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्र शामिल हैं। यह दर्शाता है कि इन बीमारियों का प्रसार व्यापक है और इन पर तत्काल नियंत्रण पाने की आवश्यकता है। स्वास्थ्य विभाग ने इन जिलों में सक्रिय निगरानी और जागरूकता अभियान तेज कर दिए हैं। स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर फॉगिंग और लार्वा नियंत्रण के उपाय किए जा रहे हैं।

विशेष रूप से चिंताजनक बात यह है कि राज्य के दो जिलों में जापानी बुखार के मामले भी सामने आए हैं। यह बीमारी क्यूलेक्स मच्छर से फैलती है और मस्तिष्क को प्रभावित कर सकती है, जिससे गंभीर तंत्रिका संबंधी समस्याएँ और मृत्यु भी हो सकती है। जापानी बुखार के लक्षण तीव्र बुखार, सिरदर्द, गर्दन में अकड़न, दौरे और कोमा तक हो सकते हैं। इन दो जिलों में स्वास्थ्य विभाग ने विशेष टीमों का गठन किया है ताकि बीमारी के प्रसार को रोका जा सके और प्रभावित व्यक्तियों को तुरंत चिकित्सा सहायता प्रदान की जा सके।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने जनता से अपील की है कि वे इन बीमारियों से बचाव के लिए आवश्यक सावधानी बरतें। इसमें अपने घरों और आसपास के इलाकों में पानी जमा न होने देना, कूलर, गमलों और अन्य बर्तनों से पानी को नियमित रूप से खाली करना, सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करना, पूरी बाजू के कपड़े पहनना और मच्छर भगाने वाले स्प्रे का उपयोग करना शामिल है। किसी भी तरह के बुखार या बीमारी के लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने की सलाह दी गई है।

सरकार ने इन बीमारियों के प्रसार को रोकने और प्रभावितों को उचित उपचार प्रदान करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया है। सामुदायिक भागीदारी और जागरूकता ही इन बीमारियों से प्रभावी ढंग से लड़ने की कुंजी है।


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