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अपनी पहचान से कोसों दूर हो रही है मुनीडीह का डीएवी स्कूल

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Byadmin

Aug 18, 2025

पुटकी: राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर अपनी शैक्षणिक उत्कृष्टता और खेलकूद में शानदार प्रदर्शन के लिए पहचाना जाने वाला मुनीडीह डीएवी पब्लिक स्कूल इन दिनों अपनी ही बनाई पहचान से कोसों दूर होता जा रहा है। एक समय था जब इस प्रतिष्ठित संस्थान में अपने बच्चों का नामांकन करवाना हर अभिभावक का सपना होता था, लेकिन आज स्थिति बिल्कुल विपरीत है। अभिभावक अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं और अन्य विकल्पों की तलाश में हैं। इस बदलते परिदृश्य के पीछे कई कारण हैं, जिनमें नेतृत्व परिवर्तन, गिरता अनुशासन स्तर और शिक्षा की गुणवत्ता में कथित गिरावट शामिल हैं।

​अभिभावकों के अनुसार, स्कूल का भवन और शैक्षणिक ढांचा भले ही वही हो, लेकिन छात्रों और स्कूल का माहौल पहले जैसा नहीं रहा। वे बताते हैं कि बच्चों का दूसरे स्कूलों की ओर पलायन इस बात का प्रमाण है कि कहीं न कहीं कुछ तो गलत हो रहा है। हाल ही में स्कूल में नेतृत्व परिवर्तन हुआ है, और एक नई प्राचार्या ने कार्यभार संभाला है। इस बदलाव से अभिभावकों में उम्मीद की एक नई किरण जगी है। उन्होंने कुछ सकारात्मक बदलावों का भी जिक्र किया है, जैसे कि शिक्षा के स्तर में आंशिक सुधार और कुछ ठोस निर्णय जो नई प्राचार्या द्वारा लिए गए हैं।

​हालांकि, सबसे बड़ी चिंता का विषय छात्रों, विशेषकर उच्च कक्षाओं के बच्चों में अनुशासन और संस्कारों की कमी है। अभिभावक बताते हैं कि स्कूल आने-जाने के दौरान बच्चों का व्यवहार और उनकी भाषा बेहद निराशाजनक होती है। आए दिन छात्रों के बीच छोटी-छोटी बातों पर बाहरी लड़कों को बुलाकर मारपीट और गाली-गलौज की घटनाएं सुनने को मिलती हैं, जिससे न केवल स्कूल की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचती है, बल्कि छात्रों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े होते हैं।

​अभिभावकों का यह भी कहना है कि छात्रों में शिक्षकों और शिक्षिकाओं के प्रति आदर और सम्मान का घोर अभाव है। यह एक ऐसी समस्या है, जो अगर समय रहते नियंत्रित नहीं की गई, तो स्कूल के शैक्षणिक और नैतिक माहौल को पूरी तरह से नष्ट कर सकती है। उनका मानना है कि शिक्षकों और छात्रों के बीच का सम्मानजनक रिश्ता ही किसी भी शिक्षण संस्थान की नींव होता है।

​इस स्थिति को सुधारने के लिए तत्काल और स्थायी समाधान की आवश्यकता है। केवल नेतृत्व परिवर्तन से ही समस्या का हल नहीं हो सकता। इसके लिए स्कूल प्रशासन को छात्रों में अनुशासन और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। इसमें अभिभावकों को भी अपनी भूमिका निभानी होगी, ताकि घर और स्कूल दोनों जगह से बच्चों को सही दिशा मिल सके।

​यदि समय रहते इस गंभीर समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया, तो डीएवी मुनीडीह का भविष्य उज्ज्वल नहीं होगा। यह न केवल छात्रों के भविष्य को प्रभावित करेगा, बल्कि इस संस्थान की दशकों पुरानी प्रतिष्ठा को भी खत्म कर देगा। उम्मीद है कि नई प्राचार्या और स्कूल प्रबंधन इस चुनौती को स्वीकार करेंगे और इस स्कूल को उसके पुराने गौरव और पहचान को वापस दिलाने का हर संभव प्रयास करेंगे।


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