
बिहार में मतदाता सूची संशोधन (SIR) प्रक्रिया को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर चुनाव आयोग को अहम निर्देश दिए हैं। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि नामांकन के लिए आधार कार्ड और वोटर आईडी को वैध दस्तावेज़ के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए।

यह निर्देश ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल बिहार में SIR प्रक्रिया के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं, खासकर मानसून के दौरान इसे लागू करने को लेकर।

विपक्षी दलों का आरोप है कि मानसून के मौसम में, जब बिहार के कई हिस्से बाढ़ या जलभराव से प्रभावित होते हैं, SIR प्रक्रिया को लागू करना अनुचित है। उनका तर्क है कि ऐसे में नागरिक अपने दस्तावेज़ों को अपडेट करने या सत्यापन प्रक्रिया में भाग लेने में कठिनाई महसूस कर सकते हैं, जिससे कई पात्र मतदाता सूची से बाहर हो सकते हैं या गलतियाँ हो सकती हैं। यह आशंका भी जताई जा रही है कि इस समय का लाभ उठाकर सत्तारूढ़ दल अपनी सुविधानुसार मतदाता सूची में हेरफेर कर सकते हैं, जिससे चुनाव की निष्पक्षता प्रभावित होगी।
चुनाव आयोग ने हालांकि पहले इस बात पर जोर दिया था कि SIR प्रक्रिया को निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा करना महत्वपूर्ण है। सुप्रीम कोर्ट का नवीनतम निर्देश चुनाव आयोग पर इस बात का दबाव बढ़ाएगा कि वह प्रक्रिया को इस तरह से संचालित करे जिससे पारदर्शिता बनी रहे और सभी नागरिकों को समान अवसर मिलें।
आधार और वोटर आईडी को वैध दस्तावेज़ के रूप में मानने से नागरिकों के लिए नामांकन प्रक्रिया थोड़ी आसान हो सकती है, लेकिन मानसून के दौरान की चुनौतियों पर चुनाव आयोग को विशेष ध्यान देना होगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी पात्र मतदाता छूट न जाए। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि चुनाव आयोग इस निर्देश को कैसे लागू करता है और विपक्षी दलों की चिंताओं का समाधान कैसे करता है।
There is no ads to display, Please add some


Post Disclaimer
स्पष्टीकरण : यह अंतर्कथा पोर्टल की ऑटोमेटेड न्यूज़ फीड है और इसे अंतर्कथा डॉट कॉम की टीम ने सम्पादित नहीं किया है
Disclaimer :- This is an automated news feed of Antarkatha News Portal. It has not been edited by the Team of Antarkatha.com
