
पटना : बिहार सरकार ने एक महत्वपूर्ण फैसले में विभिन्न विभागों में 3303 अतिरिक्त राजस्व कर्मचारियों की नियुक्ति को मंजूरी दी है। यह निर्णय राज्य में भूमि सुधार विभाग के क्षेत्रीय कार्यालयों को और अधिक मजबूत करने के उद्देश्य से लिया गया है। इस कदम से भूमि संबंधी कार्यों, जैसे- लगान वसूली, जमाबंदी और भूमि अभिलेखों के रखरखाव में तेजी आने की उम्मीद है। लंबे समय से बिहार में राजस्व कर्मचारियों की कमी महसूस की जा रही थी, जिसका सीधा असर भूमि-सुधार कार्यों पर पड़ रहा था। इस नई नियुक्ति से न सिर्फ प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी, बल्कि लोगों को भी अपने भूमि संबंधी कार्यों के लिए कम परेशानी का सामना करना पड़ेगा।

*गन्ना उद्योग में भी नई नियमावली को स्वीकृति*

इस फैसले के साथ-साथ, राज्य मंत्रिमंडल ने गन्ना उद्योग विभाग के लिए एक नई नियमावली ‘बिहार ई-पर्यवेक्षक संवर्ग नियमावली 2025’ को भी स्वीकृति दी है। यह नियमावली गन्ना उद्योग में पारदर्शिता और डिजिटलीकरण को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई है। इसके तहत, गन्ना किसानों और मिलों के बीच के संबंधों को सुचारू बनाने और गन्ना आपूर्ति श्रृंखला को अधिक कुशल बनाने के लिए नई नियुक्तियां की जाएंगी। यह कदम गन्ना उद्योग को आधुनिक बनाने और किसानों की आय में वृद्धि करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।
*प्रशासनिक सुधार और रोजगार सृजन की दिशा में बड़ा कदम*
सरकार का यह निर्णय प्रशासनिक सुधार और रोजगार सृजन दोनों ही क्षेत्रों में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। एक तरफ जहां 3303 नए पदों के सृजन से युवाओं को सरकारी नौकरी के अवसर मिलेंगे, वहीं दूसरी ओर, भूमि और गन्ना उद्योग जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कार्यप्रणाली में सुधार आएगा। यह नियुक्ति प्रक्रिया जल्द ही शुरू होने की संभावना है, जिससे राज्य में भर्ती अभियानों को गति मिलेगी।
राजस्व विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इन नई नियुक्तियों से ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि विवादों को सुलझाने में भी मदद मिलेगी। वर्तमान में, राजस्व कर्मचारियों की कम संख्या के कारण कई मामलों के निपटान में देरी होती थी। नए कर्मचारियों के आने से इन मामलों का निपटान तेजी से हो पाएगा।
गन्ना उद्योग विभाग की नई
नियमावली ‘ई-पर्यवेक्षक’ पद के लिए है, जो आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर गन्ना उत्पादन और मिलिंग प्रक्रिया की निगरानी करेंगे। इससे न केवल गन्ना मिलों की कार्यक्षमता बढ़ेगी, बल्कि गन्ना किसानों को भी समय पर भुगतान सुनिश्चित हो पाएगा। कुल मिलाकर, बिहार सरकार का यह फैसला राज्य के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने और जनता को बेहतर सेवाएं प्रदान करने की दिशा में एक सकारात्मक पहल है।
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