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बिहार विधानसभा चुनाव 2025: विकास, जातीय संतुलन और संगठनिक अनुशासन पर टिकी एनडीए की चुनावी रणनीति

Byadmin

Oct 17, 2025

 

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) ने एक बहुस्तरीय रणनीति तैयार की है, जिसका नेतृत्व भाजपा अध्यक्ष जे. पी. नड्डा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह स्वयं कर रहे हैं ।

शाह ने खुद बिहार का चुनावी “वार रूम” संभालते हुए रणनीतिक बैठकों, रैलियों और संगठनात्मक समीक्षाओं के ज़रिये तय किया है कि जीत विकास, सुरक्षा और स्थिरता के एजेंडे पर ही टिकी होगी ।

सीट बंटवारा और संगठनिक सामंजस्यएनडीए ने सीटों का बंटवारा सौहार्दपूर्ण तरीके से कर लिया है। भाजपा और जदयू 101-101 सीटों पर, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) 29 सीटों पर, जबकि हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा और रालोसपा 6-6 सीटों पर चुनाव लड़ रही हैं ।

यह फेरबदल 2020 की तुलना में संतुलित माना जा रहा है, ताकि दोनों बड़ी पार्टियों के कार्यकर्ता बराबरी से सक्रिय हों ।

प्रमुख चुनावी मुद्दे और प्रचार थीमएनडीए ने इस बार “विकसित बिहार, सुरक्षित बिहार” नारे पर फोकस किया है। भाजपा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्र की उपलब्धियों—जैसे बुनियादी ढांचे, महिला सशक्तिकरण और कल्याणकारी योजनाओं—को प्रमुख बना रही है, जबकि जदयू नीतीश कुमार के सुशासन मॉडल और सामाजिक न्याय की विरासत पर भरोसा कर रही है ।

भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था और आरजेडी शासन के “जंगलराज” की याद दिलाना भाजपा की मुहिम का अहम हिस्सा है।

सामाजिक समीकरण और जनसंपर्क रणनीतिएनडीए की सबसे बड़ी ताकत उसका जातीय संतुलन और महिला मतदाता आधार है। भाजपा ऊँची जातियों, ईबीसी (अत्यंत पिछड़ा वर्ग) और महिलाओं को केंद्रित कर रही है, जबकि जदयू ग्रामीण गरीबों और दलित तबकों को लक्षित कर रही है ।

शाह ने बूथ स्तर पर 50 हज़ार से अधिक “पन्ना प्रमुख” तैनात करने की योजना बनाई है, ताकि हर घर तक पहुँच बनाई जा सके ।

विपक्ष पर आक्रामक रुखअमित शाह ने आरजेडी नेता तेजस्वी यादव के रोजगार वादों को “आर्थिक रूप से असंभव” बताते हुए आक्रामक मोर्चा संभाला है ।

एनडीए का उद्देश्य इस चुनाव को “विकास बनाम वादाखिलाफी” की लड़ाई के रूप में पेश करना है।वर्तमान परिस्थितिहालिया सर्वेक्षणों के मुताबिक एनडीए को 38 से 42 प्रतिशत तक वोट मिलने की संभावना जताई गई है, जबकि विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन 35 से 40 प्रतिशत के बीच है ।

यदि महिला और ईबीसी वोट बैंक एकजुट रहता है तो एनडीए की स्थिति मजबूत मानी जा रही है।समग्र रूप में, एनडीए की रणनीति संगठनात्मक अनुशासन, जातीय संतुलन और मजबूत प्रचार नेटवर्क पर आधारित है। अमित शाह का सीधा नेतृत्व इस चुनाव को भाजपा-जदयू गठबंधन के लिए निर्णायक साबित कर सकता है ।


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