
आज की कथा में महाराज श्री ने भक्तों को धर्म के गूढ़ रहस्यों और जीवन में धर्म की प्रामाणिकता के विषय में बताया। महाराज श्री ने कहा कि स्वयं को धर्मात्मा मानना सरल है, परंतु असली धर्मात्मा वही है जो भगवान की परीक्षा में खरा उतरता है।


धर्म की सत्यता को प्रमाणित करने के लिए भगवान हमारी परीक्षा लेते हैं, और जब हम उसमें सफल होते हैं, तभी हमारा धर्म वास्तविक और प्रभावी होता है।
श्रीकृष्ण का जन्म केवल देवकी और वासुदेव के लिए नहीं, बल्कि समस्त मानव जाति के उद्धार के लिए हुआ। जो व्यक्ति धर्म के लिए कुछ करता है, उसका नाम संसार में अमर हो जाता है।
धर्म का सच्चा अनुयायी वही है जो सत्य के लिए खड़ा रहे, चाहे दुनिया इधर की उधर क्यों न हो जाए। सनातन धर्म पर कोई आच न आने देने की प्रेरणा देते हुए उन्होंने कहा कि धर्म की रक्षा करना प्रत्येक सनातनी का कर्तव्य है।
महाराज श्री ने बताया कि जीवन के हर सुख और दुख में “राधे श्याम” का जाप करने से सारे बिगड़े हुए काम बन जाते हैं। यह मंत्र केवल शब्द नहीं, बल्कि ईश्वर से जुड़ने का माध्यम है, जो जीवन की हर कठिनाई को सरल बना सकता है।
हर सनातनी को माथे पर तिलक, हाथ में कलावा और गले में कंठी धारण करना सनातन परंपरा का प्रतीक है। यह न केवल हमारी पहचान है, बल्कि हमारी संस्कृति और धर्म के प्रति निष्ठा का भी प्रतीक है। इन प्रतीकों के माध्यम से हम अपनी आत्मा और परमात्मा के बीच संबंध को मजबूत कर सकते हैं।इस कथा को सफल बनाने में प्रमुख परिवार किशोरी गुप्ता, कस्तूरी देवी बिजय झा शिवानी झा,अशोक कुमार वर्मा गीता देवी,विनय कृष्ण गुप्ता, अल्का देवी,बिजया गुप्ता बबीता देवी, श्रीकृष्ण गुप्ता नर्मदा देवी, संजय चौधरी,सुमन चौधरी,अवधेश प्रसाद गुप्ता मनिषा देवी,मनोज कुमार गुप्ता कविता गुप्ता,उदय वर्मा सुष्मा वर्मा,सुशील खैतान माया खैतान,महेश अग्रवाल,राजेश चौखानी,बिकास साहू, हिम्मत सिंह सुमन देवी,संजय गुप्ता आदि समाज के सहयोग से किया जा रहा है।
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