
सरायकेला : जहेरा स्थल में पारंपरिक रीति रिवाज के अनुसार मुख्य देवरी और सहायक देवरी द्वारा मरांग पर्व के दिन गांव की सुख,समृद्धि, शांति एवं मंगलकामना के लिए विधिवत पूजा अर्चना किये जिसमें सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण श्रद्धा के साथ कार्यक्रम में शामिल हुए।

पूजा अर्चना के बाद गांव में पारंपरिक संस्कृति कार्यक्रम आयोजन किया गया है

हो जनजाति के अत्यंत महत्वपूर्ण और सबसे बड़ा पारंपरिक त्यौहार है जो मुख्य रूप से माघ महीने जनवरी-फरवरी की पूर्णिमा के आसपास मनाया जाता है। यह सृष्टि रचना मानव उत्पत्ति और प्राकृतिक को धन्यवाद देने वाला त्यौहार है जिसमें सिंहबोंगा सूर्य देवता की पूजा की जाती है। यह त्यौहार समानता, सामाजिक , सद्भाव और नई फसलों की खुशहाली की समर्पित है।
सभी त्योहार हो जनजाति के द्वारा बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है सभी पर्व से सबसे मागे पर्व अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस पर्व का मुख्य उद्देश्य धन को खलियान में खत्म करने के बाद अपने रिश्तेदारों के साथ खुशी का इजहार करना होता है। इसलिए हर गांव में अलग-अलग समय पर मांगे पर मनाया जाता है ताकि सभी लोग एक दूसरे से मिल सकें।इस पर्व में रिश्तेदारों को आमंत्रित किया जाता है और सभी साथ मिलकर त्यौहार मनाते हैं। मांगे पर्व के नाच , गान के स्थान को सुसुन आंकड़ा कहा जाता है। सभी मेहमान रिश्तेदार ढोल, नगाड़ा , मांदर , बांसुरी इत्यादि के धुन से नाच गान कर पर्व को मानते हैं।
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