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उद्यमिता की नई उड़ान: हरिपद साहू की मुढ़ी मशीन से मिली आत्मनिर्भरता

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Jun 3, 2025

 

 

सरायकेला-खरसावां, झारखंड: छोटे कदम, बड़े सपने, और सरकारी

योजनाओं का सही उपयोग – इन तीनों के संगम से कैसे एक व्यक्ति की जिंदगी में बड़ा बदलाव आ सकता है, इसका जीता-जागता उदाहरण हैं राजनगर प्रखंड के चंदनखीरी गांव निवासी हरिपद साहू। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के आजीविका मद से मिली एक मुढ़ी मशीन ने हरिपद की जिंदगी में न केवल आर्थिक स्थिरता लाई है, बल्कि उन्हें एक सफल उद्यमी के रूप में स्थापित भी किया है।

जिला कृषि पदाधिकारी, सरायकेला खरसावां के मार्गदर्शन में क्रियान्वित इस योजना के तहत, हरिपद साहू को मुढ़ी मशीन उपलब्ध कराने के साथ-साथ मुढ़ी बनाने का व्यापक प्रशिक्षण भी दिया गया। इस प्रशिक्षण ने उन्हें केवल मशीन चलाने तक सीमित नहीं रखा, बल्कि व्यवसाय के विभिन्न पहलुओं को समझने में भी मदद की। मुढ़ी बनाने के कार्य को शुरू करने के साथ ही, हरिपद ने अपनी उद्यमशीलता का परिचय देते हुए पापड़ और चिप्स का निर्माण भी शुरू कर दिया।

 

व्यवसाय का विस्तार और आत्मनिर्भरता की राह

 

 

शुरुआत में, हरिपद ने अपने उत्पाद स्थानीय बाजारों में बेचने शुरू किए। चिप्स को आकर्षक पैकेट में पैक करके बेचने की उनकी रणनीति ने उन्हें तुरंत पहचान दिलाई। देखते ही देखते, उनके उत्पादों की मांग बढ़ने लगी। आज, हरिपद साहू हर महीने लगभग 9 क्विंटल चावल से मुढ़ी बनाकर बेच रहे हैं। यह एक महत्वपूर्ण आंकड़ा है, जो उनके उत्पादन क्षमता और बाजार में उनके उत्पादों की स्वीकार्यता को दर्शाता है।

 

इस छोटे से व्यवसाय से हरिपद को प्रतिमाह लगभग 8,000 रुपये की शुद्ध आय हो रही है। ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले एक व्यक्ति के लिए, यह आय न केवल जीवन स्तर सुधारने में सहायक है, बल्कि उन्हें अपने परिवार के लिए बेहतर भविष्य सुनिश्चित करने का अवसर भी प्रदान करती है। यह राशि उन्हें दैनिक जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ बचत करने और अपने व्यवसाय को और आगे बढ़ाने के लिए निवेश करने का आत्मविश्वास भी दे रही है।

 

भविष्य की योजनाएं और प्रेरणा का स्रोत

 

 

हरिपद साहू अब इस आय का उपयोग अपने व्यवसाय को बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। उनकी दूरदर्शिता और उद्यमशीलता की भावना उन्हें केवल वर्तमान सफलता से संतुष्ट होने नहीं दे रही है, बल्कि भविष्य के लिए बड़े लक्ष्य निर्धारित करने के लिए भी प्रेरित कर रही है। वह अपने व्यवसाय को और अधिक विस्तार देने, नए उत्पाद जोड़ने और शायद अधिक लोगों को रोजगार देने की दिशा में सोच रहे हैं।

हरिपद साहू की यह सफलता कहानी उन हजारों ग्रामीण उद्यमियों के लिए एक प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद कुछ बड़ा करने का सपना देखते हैं। यह इस बात का भी प्रमाण है कि सरकारी योजनाएं, यदि सही ढंग से लागू की जाएं और लाभार्थी द्वारा उनका सही उपयोग किया जाए, तो वे ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। हरिपद की यात्रा दर्शाती है कि दृढ़ संकल्प, सही प्रशिक्षण और थोड़े से सहयोग से कोई भी व्यक्ति अपने सपनों को हकीकत में बदल सकता है और अपने समुदाय के लिए एक प्रेरणा बन सकता है। उनका व्यवसाय न केवल उन्हें बल्कि उनके गांव को भी आर्थिक रूप से मजबूत बना रहा है।


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