
बलियापुर : बिनोद कुंभकार द्वारा करमाटांड़ में पांच दिवसीय रामचरितमानस महायज्ञ मे श्री राम कथा के द्वितीय दिवस में कथा व्यास सुश्री आकृति तिवारी ने कहा वाल्मीकि जी का ही तुलसीदास के रूप में दूसरा जन्म हुआ ।वाल्मीकि जी रत्नाकर डाकू थे ।सप्तऋषियों ने उन्हें राम मंत्र का जप करने को कहा वे इतने पापी थे के उनके मुख से राम नाम नहीं निकल पा रहा था वे उल्टा जपते थे। रामायण जैसे ग्रन्थ की रचना की राम का नाम प्रभु के हजार नाम के बराबर है ।सीता राम कहने में प्रभु का 108 माला जप करने का फल मिलता है। वर्तमान संस्कृति ने बच्चे आजकल हाय बाय हेलो कहते है। मातापिता को चाहिए कि अपने बच्चों को उचित संस्कार दे तभी भारत विश्वगुरु बन सकेगा ।

तुलसीदास जी ने अवधि भाषा में सरल सहज मधुर चौपाई का वर्णन किया है जिसे गांव गांव में कम पढ़े लिखे लोग भी इसे गाते है।

रामचरित मानस रूपी सरोवर के चार घाट है वाल्मीकि, याज्ञवल्क्य, काकभुसुंडि और तुलसीदास जी
इस सरोवर में डूबने से साक्षात् मोक्ष मिलती है ।इस ग्रन्थ में सभी जीवो की वंदना की गई है एक चौपाई जीवन का मूल मंत्र है हमारे भारत भूमि में इतना ज्ञान भरा है कि चीनी यात्री फाहयान ने यहां से ज्ञान प्राप्त कर गीता रामायण ग्रन्थ चीन ले गया था। नेपोलियन के गुरु ने उसे भारत से गंगा जल लाने का आदेश दिया था ।
महानदी को चित्रोपला गंगा नाम प्रदान करने वाले अगस्त ऋषि है सनातन धर्म विश्व में केवल भारत देश में ही है। आज विदेशी लोग भी यहां से ज्ञान प्रात कर रहे है भारत विश्वगुरु था जहां भगवान राम ने अवतार ग्रहण किया हमारा सनातन धर्म सभी को गले लगाना चाहता है ।
शिव सती प्रसंग में कहा सती ने जानकी का रूप लेकर राम की परीक्षा ली भगवान राम जान गए ये सती माता है माता को प्रणाम किया ।
शिव जी भी समझ गए के सती जी इस शरीर से मेरे पास में नहीं रह सकती सती ने शिव जी से झूठ बोल दिया यही कारण बना कि
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