
झारखंड की धरती से निकलने वाले कोयले से पूरे देश को रोशन करने वाले डीवीसी और एनटीपीसी जैसी केंद्रीय कंपनियों की उदासीनता के कारण आज हजारीबाग, रामगढ़ और चतरा सहित बड़कागांव क्षेत्र गहन बिजली संकट का सामना कर रहा है। बड़कागांव की पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने इस गंभीर मुद्दे पर भाजपा के स्थानीय सांसद और विधायकों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि यह केवल दुर्भाग्यपूर्ण राजनीति नहीं, बल्कि जनता के प्रति घोर उपेक्षा का प्रमाण है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने स्पष्ट किया, “यह अत्यंत हास्यास्पद है कि जब केंद्र में डीवीसी जैसी बिजली आपूर्ति करने वाली केंद्रीय कंपनी की जिम्मेदारी भाजपा सरकार की है, तब भी हमारे स्थानीय भाजपा सांसद और विधायक सिर्फ धरना-प्रदर्शन कर जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं।

यह कोरी राजनीति है, बिजली कटौती का समाधान नहीं। इस विकट स्थिति के लिए भाजपा ही सबसे बड़ी जिम्मेदार है, क्योंकि हजारीबाग जिले के सभी विधायक और स्थानीय सांसद भाजपा से ही हैं। उन्हें अपनी केंद्रीय सरकार से समाधान मांगना चाहिए जो की भाजपा शासित है , न कि यहां नौटंकी करनी चाहिए।”
अंबा प्रसाद ने अपने कार्यकाल को याद करते हुए बताया, “जब केंद्र में हमारी सरकार नहीं थी, तब भी मैंने अपनी पहली विधायकी के दौरान बड़कागांव की बिजली समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए एनटीपीसी और डीवीसी पर दबाव बनाया था। कागजी कार्यवाही से लेकर हर संभव प्रयास किया, उसी का परिणाम है कि बड़कागांव में 220/33 केवी पावर सबस्टेशन की स्वीकृति कैबिनेट से मिली और तत्कालीन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी के साथ मैंने स्वयं पकरी बरवाडीह में इसकी आधारशिला रखी थी। आज जब इस महत्वपूर्ण परियोजना का कार्य बाधित है, तो इसका कारण केंद्र सरकार के अधीन एनटीपीसी द्वारा भूमि के लिए एनओसी न देना है। यह वही एनटीपीसी है, जो पहले जमीन देने को राजी थी!
आज भाजपा के एक सांसद और चार विधायक होने के बावजूद वे अपनी ही केंद्र सरकार की कंपनी से जमीन नहीं दिलवा पा रहे हैं। यह उनकी घोर अक्षमता और जनता के प्रति उदासीनता को दर्शाता है। क्या उन्हें यह भी नहीं पता कि कौन सा काम कहां से और कैसे होता है?”
नवनिर्वाचित विधायक रोशन लाल चौधरी पर निशाना साधते हुए अंबा प्रसाद ने कहा, “केवल भाजपा नेता ही नहीं, बल्कि बड़कागांव की जनता भी इस बिजली संकट के लिए कहीं न कहीं जिम्मेदार है, क्योंकि उन्होंने ऐसे विधायक को चुना है, जिन्हें यह भी नहीं पता कि बिजली व्यवस्था कहां से सुदृढ़ होगी और किसे बात करने से क्या कार्य होगा।
अगर वाकई भाजपा नेताओं को बिजली समस्या से लोगों को निजात दिलाना है, तो वे एनटीपीसी का कोयला रोककर दिखाएं! लेकिन वे ऐसा नहीं करेंगे, क्योंकि कोयला ट्रांसपोर्टिंग से जुड़े सभी बड़े चेहरे भाजपा से ही जुड़े हैं और कोयला भी केंद्र सरकार को जाता है। स्पष्ट है कि इन्हें यहां के वासियों के सुख-दुख से कोई सरोकार नहीं है।
झारखंड की जनता को यह समझना होगा कि उनके हक और अधिकार के लिए कौन लड़ रहा है और कौन केवल राजनीतिक रोटियां सेक रहा है। हम झारखंड के लोग अपनी ऊर्जा के लिए भीख नहीं मांगेंगे, यह हमारा हक है और हम इसे लेकर रहेंगे!”
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